📰 Kotputli News
Breaking News: एनईईटी पेपर लीक कांड: डॉ. शुब्हम खैर्नार—मराठवाडा की पहली गिरफ्तार, जिसने कभी पूरा नहीं किया मेडिकल कोर्स
🕒 1 day ago

एनईईटी (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षण) के पेपर लीक समेत कई एडमीशंस झंझटों की खबरों ने इस बार एक अनोखे व्यक्तित्व को राष्ट्रीय खबरों के शीर्ष पर ला दिया है। मराठवा में 'डॉ.' शुब्हम खैर्नार को एएनईईटी 2026 के प्रश्नपत्र के लीक में पहला गिरफ़तार माना गया। जाँच के दौरान पता चला कि वह न तो किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से डाक्टरी डिग्री प्राप्त कर चुका है, न ही उसने कभी पूरा किया है। फिर भी उसे कई छात्रों को छद्म डॉक्टर की तरह पेश करके, अनधिकृत माध्यमों से पेपर का प्रसारण करने का आरोप है। शुब्हम खैर्नार का इतिहास काफी उलझन भरा है। वह शुरुआती वर्षों में स्थानीय कॉलेजों में विज्ञान के छात्र के रूप में पढ़ता रहा, परन्तु डिग्री पूरी न हो पाने के कारण वह व्यक्तिगत रूप से प्रयोगशालाओं और कोचिंग सेंटरों में काम करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपनी खुद की छोटी टिकाऊ क्लिनिक स्थापित की, जहाँ वह ‘डॉक्टर’ के रूप में रोगियों को परामर्श देता था। इस घोटाले की जांच में सामने आया कि उसने अपनी नस्लीय पहचान को छुपाने के लिए विभिन्न दस्तावेज़ बनवा कर अपने आप को ‘डॉ.’ घोषणा किया था। उन दस्तावेज़ों में वही फर्नीचर, वही साइनिंग, वही फ़ोटो और समान शैक्षणिक प्रमाण पत्र दिखाए जाते थे, जिससे वह कई छात्रों को भरोसा दिला पा रहा था कि वह विश्वसनीय मार्गदर्शक है। विपरीतता में वह 2025 में NEET 2026 के प्रश्नपत्र के लीक करने की घटना में शामिल हो गया। जाँच एजेंसियों ने पाया कि कागज, प्रिंटिंग इंक, और प्रश्नपत्र की फाइलें कई पत्र वितरण कंपनियों के माध्यम से कोचिंग सेंटरों तक पहुंची थीं। शुब्हम के मोबाइल फोन में लीक हुए प्रश्नपत्र की कई स्कैन की हुई फाइलें मिलीं, जिनमें वह स्वयं ने उत्तर कुंजी की व्याख्या की थी। कई छात्र इस फाइलों को सोशल मीडिया और निजी समूहों में शेयर कर रहे थे, जिससे परीक्षा में अनियमितता का बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया। राज्य सरकार ने इस कांड को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। मराठवा पुलिस ने शुब्हम खैर्नार को जेल में बंद कर दिया और उसके खिलाफ मेडिकल फ़र्जी दस्तावेज़, धोखाधड़ी और परीक्षा में हेराफेरी के आरोपों में मुकदम़ा दायर किया है। साथ ही, इस मामले में शामिल कई अभिभावक और कोचिंग संस्थानों के खिलाफ भी जांच जारी है। सरकार ने इस अवसर पर सभी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के दायरे में कड़ी निगरानी और कड़ी सजा की घोषणा की है, जिससे भविष्य में ऐसे किसी भी प्रकार के पेपर लीक को रोका जा सके। समग्र रूप से कहा जा सकता है कि शुब्हम खैर्नार का मामला न केवल एक व्यक्तिगत धोखाधड़ी का उदाहरण है, बल्कि यह प्रणालीगत खामियों और कड़ाई की कमी को भी उजागर करता है। इस प्रकार की घटनाएँ नीतिगत बदलाव, सख्त निगरानी और वैध सूचना वितरण के प्रति जन जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। यदि उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में समान कांड दोहराए जा सकते हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस कारण, सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ईमानदार और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 14 May 2026