📰 Kotputli News
Breaking News: तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके का बंटवारा: फ़्लोर टेस्ट से पहले अचानक खुली दांवपेंच
🕒 1 hour ago

तमिलनाडु की राजनीति आज एक नाटकीय मोड़ पर खड़ी है। राज्य में लगातार चल रहे विरोध को देखते हुए, सरकारी प्रमुख की फ़्लोर टेस्ट का समय नजदीक आया है और इस महत्त्वपूर्ण अवसर से पहले एआईएडीएमके (ऐडवांस्ड इण्डियन डेमोक्रेटिक अलायंस) के भीतर गहरा विभाजन उजागर हुआ है। पार्टी के दो प्रमुख गुट—सीवी शन्मुगम के अनुयायी और एंटी‑ईपीएस फैंशन—बिखरते समीकरणों के बीच अपने-अपने पड़ाव तय कर रहे हैं, जिससे विधानसभा में बहुमत हासिल करने की जटिलता बढ़ गई है। इस बीच, टिवीके (तामिलनाडु वैजयनावुम) के समर्थन को लेकर दोनों गुटों ने अलग-अलग बयान दिए हैं, जिससे दल की एकजुटता पर गंभीर सवाल उठे हैं। आधिकारिक तौर पर एआईएडीएमके के भीतर दो प्रमुख धड़ों का उदय देखा गया है। एक ओर सीवी शन्मुगम की फेक्शन, जो पहले से ही टीवीके को समर्थन देने का इशारा कर चुकी है, वह अब पार्टी के मुख्य नेता पल्लनीस्वामी के खिलाफ खड़ी हो गई है। इस धड़े के प्रतिनिधियों ने कहा है कि टीवीके के साथ गठबंधन से एआईएएमके को राजनीतिक स्थिरता मिलेगी और विपक्षी दलों के साथ संभावित गठबंधन को रोका जा सकेगा। दूसरी ओर, एंटी‑ईपीएस गुट ने स्पष्ट रूप से विक्रमसिंह के विरोध में अपनी स्थिति को दोहराया है और उन्होंने बताया कि वे केवल वही मंच ही समर्थन देंगे, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों को सुरक्षित रखे। इस गुट ने टीवीके को समर्थन की घोषणा की है, जिससे एआईएडीएमके के भीतर तीव्र सवाल उठे हैं। विधानसभा में बहुमत को लेकर असमंजस स्पष्ट है। कई विधायक इस बात को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं कि कौन सा गुट सच्ची प्रतिनिधित्व का दायित्व निभाएगा। कुछ मिलियनों के आंकड़े दर्शाते हैं कि एंटी‑ईपीएस फैंशन ने अपने सदस्यत्व वाले सांसदों की संख्या को सार्वजनिक किया है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकार के विरोधी पक्ष में पर्याप्त संख्या में प्रतिनिधि हो सकते हैं। इस स्थिति में यदि फ़्लोर टेस्ट में एआईएडेमके के दो हिस्से एक साथ नहीं हो पाते, तो सरकार को गिरने का जोखिम बढ़ जाता है। समाप्ति में कहा जा सकता है कि एआईएडेमके का यह बंटवारा तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा को पुनः परिभाषित कर सकता है। यदि दोनों धड़े अपनी-अपनी रणनीति में सफल होते हैं, तो राज्य में नयी गठबंधन संरचना बन सकती है, जिससे भविष्य में शासन की स्थिरता पर प्रभाव पड़ेगा। दूसरी ओर, यदि दल के भीतर समन्वय नहीं बन पाता, तो यह फ़्लोर टेस्ट राज्य के नेताओं को कई चुनौतियों के साथ सामना करने के लिये मजबूर कर देगा। तदनुसार, तमिलनाडु के नागरिकों को भी इस विभाजन के परिणामों को समझना आवश्यक होगा, क्योंकि इसका असर उनके दैनिक जीवन और भविष्य की राजनीतिक दिशा दोनों पर पड़ेगा।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 12 May 2026