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Breaking News: एआईएडीएमके के शैनमुगम दल ने टि.वी.के. को समर्थन दिया, ई.पी.एस. की सीएम आकांक्षा उजागर
🕒 58 minutes ago

राजनीतिक दलों के बीच गठजोड़ की धुरी पर एक नया मोड़ आया है। तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी एआईएडीएमके के विभाजन के बाद, सी.वी.शैनमुगम के नेतृत्व में बना फैक्शन आधिकारिक तौर पर टि.वी.के. को अपना समर्थन घोषित कर चुका है। यह घोषणा न केवल पार्टी के भीतर की असंतुष्टि को उजागर करती है, बल्कि आगामी विधानसभा में गठबंधन की दिशा को भी पुनः निर्धारित करती है। शैनमुगम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ई.पी.एस. (एडवांस्ड पॉपुलर रिलीजन) ने पहले डेमोक्रेटिक प्रोफेसर पार्टी (डीएमके) के साथ मिलकर सीएम पद का लक्ष्य रखा था, परन्तु इस योजना के विफल हो जाने के बाद टि.वी.के. के साथ सहभागिता को प्राथमिकता दी गई। इस समर्थन घोषणा के पीछे कई कारक कार्य कर रहे हैं। सबसे प्रमुख है एआईएडीएमके के आंतरिक वर्गीकरण में बढ़ती तनाव और नेतृत्व संघर्ष। शैनमुगम के समूह ने कई बार एआईएडीएमके के पार्लियामेंटरी नेताओं के साथ मतभेदों को प्रकाश में लाया है, जिससे उन्होंने अपने उदय को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। टि.वी.के., जो वर्तमान सरकार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए शैनमुगम के दल को एक बुनियादी शक्ति के रूप में स्वीकार किया। इस प्रकार, दोनों पक्षों के बीच समझौते के संकेत साफ़ तौर पर देखे जा रहे हैं, जिसमें टि.वी.के. को एआईएडीएमके के अनुभवी नेता मिलेंगे और शैनमुगम के दल को एक स्पष्ट राजनीतिक दिशा मिलेगी। ई.पी.एस. की सीएम आकांक्षा की बात करने पर शैनमुगम ने यह स्पष्ट किया कि एआईएडीएमके के भीतर के कुछ वरिष्ठ नेता, जिनमें ई.पी.एस. भी शामिल हैं, उन्होंने पहली बार डीडीएमके के समर्थन से सरकार बनाए रखने की कोशिश की थी। परन्तु वार्तालापों के दौरान कई बिंदुओं पर असहमति हुई, जिससे यह गठबंधन विफल हो गया। इस असफलता के पश्चात् शैनमुगम ने टि.वी.के. के साथ मिलकर एक नया संतुलन स्थापित किया, जिससे एआईएडीएमके के भीतर के विभाजन को स्थायी रूप से पक्का किया गया। अगले कुछ हफ्तों में इस गठबंधन का प्रभाव देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। विधानसभा में फर्श परीक्षण (फ्लोर टेस्ट) के निकट आने पर, एआईएडीएमके के दोहरे पक्षों का समर्थन या विरोध सरकार की स्थिरता को सीधे प्रभावित करेगा। यदि टि.वी.के. के सहयोग से शैनमुगम का समूह सफलतापूर्वक वोटों को संभाल लेता है, तो वह एक रणनीतिक लाभ हासिल कर लेगा, जिससे भविष्य में वह पार्टी के भीतर एक महत्वपूर्ण संवादात्मक शक्ति बन सकता है। वहीं, यदि डीडीएमके के साथ पुन: गठबंधन की संभावना फिर से उभरती है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में नई अस्थिरता का कारण बन सकती है। निष्कर्षतः, शैनमुगम के फैक्शन द्वारा टि.वी.के. को समर्थन देना तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक निर्णायक मोड़ दिखाता है। यह कदम न केवल एआईएडीएमके के भीतर की मौजूदा फूट को बेहतर रूप से उजागर करता है, बल्कि आगामी बजट एवं नीति निर्धारण में भी गहरा असर डालेगा। डीडीएमके की गठबंधन वार्ता विफल होने के बाद, ई.पी.एस. और टि.वी.के. के साथ नई गठबंधन की दिशा में चलना तमिलनाडु के राजनीतिक माहौल को नई दिशा में ले जाएगा, जिससे आगामी चुनावों और शासन के स्थायित्व दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 12 May 2026