तमिलनाडु के नएमुख्यमंत्री वी.के. विज़य ने अपने शासनकाल की पहली बड़ी घोषणा की, जिसमें उन्होंने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और आवागमन के मुख्य बिंदुओं के निकट स्थित 717 टैमास्क (शराब) दुकानों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया। यह कदम राज्य में शराब की बाढ़ को रोकने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब के नशे से छात्रों, बच्चों और आम जनता की स्वास्थ्य व सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, इसलिए ऐसे प्रतिष्ठानों को शून्य दूरी में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विज़य सरकार ने इस आदेश को लागू करने के लिए एक विशेष कार्यदल गठित किया है, जो निकटतम विद्यालय, महाविद्यालय, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और बस स्टैंड के आसपास स्थित टैमास्क दुकानों की सूची तैयार करेगा। इन दुकानों को खुल्ला करना या उनका लाइसेंस रद्द करना आदेश के उल्लंघन पर सख्त दंड के साथ लागू किया जाएगा। राज्य के कई प्रमुख शहरों में इस उपाय के कारण पहले ही कई दुकानों को बंद किया जा चुका है, और आशा की जा रही है कि यह कार्यवाही जल्द ही पूरे राज्य में फैलेगी। शिक्षा और धार्मिक संस्थानों के पास शराब के निकटस्थ होने से होने वाले सामाजिक दुरुपयोग और अपराध दर में वृद्धि का ऐतिहासिक आँकड़ा भी इस कदम को समर्थन देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शराब की दुकानों को इन संवेदनशील क्षेत्रों से हटाने से न केवल युवाओं की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रहेगा, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। कई माता-पिता ने इस नई नीति का स्वागत किया है और बताया कि अब उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा में व्यवधान की चिंता नहीं रहेगी। दूसरी ओर, शराब व्यापारियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह उनके रोजगार और राजस्व को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि किसी वैकल्पिक रोजगार योजना या लाभांश के माध्यम से इस नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जाए। फिर भी, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक कल्याण को आर्थिक हितों से ऊपर रखा गया है और इस दिशा में आगे भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। सारांशतः, तमिलनाडु में टैमास्क की 717 दुकानों के बंद होने से सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और धार्मिक सौहार्द को नई दिशा मिलेगी। यह कदम दिखाता है कि नई सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त, स्वस्थ और सुरक्षित समाज की नींव रखने के लिए साहसिक निर्णय लेने को तैयार है। भविष्य में इस नीति के परिणामों का जाँच-पड़ताल जारी रहेगा, पर अभी तक की प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि यह कदम जनता के बड़े हिस्से द्वारा सराहा गया है।