भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इरान-इज़राइल के तनाव के चलते भारतवासियों को घर से काम करने और विदेश यात्रा को सीमित करने का सख्त आह्वान किया है। यह कदम जब देश में आर्थिक अस्थिरता और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है, तब आया है। प्रधानमंत्री ने सीधे सामाजिक माध्यमों और राष्ट्रीय चैनलों के माध्यम से सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतें और अनावश्यक प्रवास से बचें। विदेश यात्रा पर प्रतिबंध का अर्थ यह नहीं कि सभी यात्रा बंद हो जाएगी, बल्कि यह विदेशियों के साथ संपर्क को न्यूनतम रखने की सलाह है, जिससे संभावित खतरों से बचा जा सके। मोदी सरकार का यह कदम आर्थिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। विदेश यात्रा में वृद्धि के साथ साथ विदेशी मुद्रा की मांग भी बढ़ रही है, जिससे रिज़रव पर दबाव बढ़ रहा है। घर से काम करने से न केवल कर्मचारियों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि ऊर्जा बचत और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। इस दिशा में पहले से ही प्रधानमंत्री ने ईंधन बचत के लिए जनता से अपील की थी, जिसे कई विशेषज्ञों ने आर्थिक असफलता की संकेतक कहा है। अब इस नई नीति के माध्यम से सरकार आर्थिक स्थिरता को पुनः स्थापित करने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री ने सोने की खरीद पर भी रोक लगाने की सलाह दी, यह कहते हुए कि वर्तमान में घरेलू मुद्रा को स्थिर रखने के लिये सोने में निवेश को कम करना आवश्यक है। विदेशी मुद्रा बाजार में निरंतर उतार-चढ़ाव के कारण सोने की कीमतें बढ़ रही थीं, जिससे आम जनता में घबराहट का माहौल बना हुआ था। मोदी सरकार ने इस अवसर पर लोकल मुद्रा को सुदृढ़ करने हेतु सोने की मांग को घटाने का सुझाव दिया, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत को प्रोत्साहित किया जा सके। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विदेशी मुद्रा में अनावश्यक बचाव को रोक सकता है और राष्ट्रीय आर्थिक संरचना को सुदृढ़ कर सकता है। मुख्य विपक्षी नेताओं ने इस कदम की तीखी आलोचना की। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के इस कदम को "विफलता का सबूत" कहकर विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि यह नीतियां असफलता की निशानी हैं और आम जनता को आर्थिक बोझ नहीं बढ़ा रही हैं। वहीं हिन्दुस्तान टुडे और द हिन्दु स्टेट के विशेषज्ञों ने कहा कि ये नीतियां समय की जरूरत को दर्शाती हैं, और यदि सही ढंग से लागू की गईं तो यह संकट के समय में भारत को स्थिरता प्रदान कर सकती हैं। निष्कर्षतः, इरान-इज़राइल के युद्ध की परिप्रेक्ष्य में मोदी सरकार का यह व्यापक आह्वान सुरक्षा, ऊर्जा बचत तथा आर्थिक स्थिरता के तीनों पहलुओं को जोडता है। घर से काम करने और विदेश यात्रा को सीमित करने की नीति से न केवल नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि विदेशी मुद्रा के उपयोग में भी कटौती होगी। सोने की खरीद पर प्रतिबंध से बाजार में अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है। हालांकि, यह कदम देश के भीतर सांविधिक व राजनीतिक बहस को भी जन्म देगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस नई नीति का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा।