संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में ईरान को एक नया प्रस्ताव पेश किया, जिसमें आर्थिक प्रतिबंधों को हटा देने की पेशकश के साथ 30 दिन की वार्ता अवधि तय की गई। यह कदम ट्रम्प प्रशासन के दौरान प्रस्तुत किए गए शर्तों से बिल्कुल अलग था, जिसे स्वयं ट्रम्प ने "अस्वीकार्य" शब्दों में वर्णित किया था। अमेरिकी प्रस्ताव के सामने इरान ने अपना दृढ़ रुख दिखाया और इस प्रस्ताव को टकराव के बजाय समझौते की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में नहीं माना। इरान के प्रमुख राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव पर गहन विश्लेषण किया। खमेनेई के सलाहकार ने कहा कि अब इरान ने "रणनीतिक धैर्य" की नीति को समाप्त कर दिया है और वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने को तैयार है। उनके अनुसार, आर्थिक प्रतिबंधों का पूर्ण उन्मूलन और सीमित समय के भीतर वार्ता का दबाव इरानी जनता और सरकार दोनों के लिए स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इससे देश की सम्पूर्ण संप्रभुता और ऊर्जा क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इरानी दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस प्रस्ताव के प्रति अस्पष्टता जताते रहे। एक वरिष्ठ आईआरजीसी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी शांति योजना में कई अनिश्चित तत्व हैं, जो ईरान को असुरक्षित स्थिति में डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान कोई भी शर्त नहीं मानेंगे जो उसके परमाणु कार्यक्रम या क्षेत्रीय प्रभाव को घटाने की मांग करती हो। इसी दौरान, इरान के उप-संरक्षक ने कहा कि स्ट्रैट ऑफ़ होरमज़ को दोबारा खोलने की कोई इरादा नहीं है और वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक स्थिर नीति बनाए रखने पर दृढ़ है। इरान के विभिन्न मीडिया स्रोतों ने भी इस प्रस्ताव को निरंकुश और दमनकारी के रूप में वर्णित किया। टेलीग्राफ़ ने बताया कि इरान ने ट्रम्प की शीतकालीन शांति योजना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और नाभिकीय हथियारों की डिलीवरी में कोई समझौता नहीं करेगा। इस बीच, द हिंदुस्तान टाइम्स ने इरान के भीतर इस प्रस्ताव के कारण उत्पन्न तनाव और सार्वजनिक प्रतिक्रिया को उजागर किया, जहाँ कई नागरिक आर्थिक प्रतिबंधों के अंत की उम्मीद कर रहे हैं, परंतु साथ ही वे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों को लेकर सावधान भी हैं। निष्कर्षतः, अमेरिकी प्रस्ताव ने इरान को एक कठिन चुनौतियों के मोड़ पर खड़ा किया है। जबकि आर्थिक राहत की संभावना एक आकर्षक पहलू है, 30‑दिवसीय वार्ता की सीमित अवधि और शर्तों का असंतुलन इरान की रणनीतिक और सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रहा है। इरान ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि वह किसी भी समझौते को तभी स्वीकृत करेगा जब उसके राष्ट्रीय हित, संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके। इस स्थिति में आगे की कूटनीतिक बातचीत के लिए दोनों पक्षों को अधिक लचीलापन और पारस्परिक भरोसे के आधार पर पुनः चर्चा करनी होगी।