केरला में दो बड़े राष्ट्रीय दलों के बीच सरकार गठन की प्रक्रिया ने राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने प्रधान मंत्री पर सीएम के चयन में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में जनता को अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। वहीं विपक्षी दल ने उल्लेख किया कि दिल्ली में बीजेपी को एक पूरा महीना‑पाँच दिन लग गया था वाणिज्यिक गठबंधन तैयार करने में, जो इस प्रदेश में दलों के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है। केरला में सत्ता संतुलन का सवाल कई दिनों से राजनीतिक चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। कांग्रेस के प्रमुख कार्यकर्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से राज्य के राजनीतिक नेतृत्व में अटकाव उत्पन्न हो रहा है, जबकि वे खुद भी अपना सीएम उम्मीदवार तय करने के लिए अंततः संकल्प नहीं ले पाए हैं। दूसरी ओर, बीजेपी ने दिल्ली में अपने अनुभव को उदाहरण बनाते हुए कहा कि उन्होंने पिछले चुनाव में 50 दिनों में एक मजबूत गठबंधन तैयार किया था, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि समय-सीमा में लचीलापन और रणनीतिक कदम जरूरी हैं। इस बीच के स्थानीय राजनीति में दो प्रमुख नेतागण, के.सी. वेणुगोपाल और वी.डी. सथीशान, लगातार अपने-अपने पक्ष की ओर से जनता को आश्वासन देने की कोशिश में लगे हुए हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस ने अभी तक सीएम का नाम नहीं बताया है, जबकि सथीशान ने विचार मंच पर कहा कि नेताओं को राज्य के भविष्य पर गंभीर विचार करना चाहिए, तभी वह कई राज्यों में सत्ता वापस जीतने में सफल हो सकते हैं। दोनों ही नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए और जनता को स्थिरता प्रदान करने के लिये शीघ्र निर्णय लेना अनिवार्य है। केरला में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चेनिथाला ने कहा कि सीएम चयन एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसमें सभी दलों के प्रतिनिधियों को समान अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के भीतर मौजूद विभिन्न मतभेदों को सुलझाने के लिये समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस रास्ते पर बढ़ते हुए राजनीतिक तनाव ने राज्य में जनमानस को घबराहट में डाल दिया है, क्योंकि कई नागरिक अपनी रोज़मर्रा की समस्याओं के समाधान के लिये एक स्पष्ट और तेज़ी से काम करने वाली सरकार की उम्मीद कर रहे हैं। अंत में यह कहा जा सकता है कि केरला में सरकार गठन की प्रक्रिया अभी भी अनिश्चितता से भरपूर है। कांग्रेस के प्रधान मंत्री पर सीएम चयन में देरी का आरोप और बीजेपी द्वारा दिल्ली में 50 दिनों के त्वरित गठबंधन का उदाहरण दोनों ही पक्षों की रणनीति को उजागर करते हैं। यदि जल्दी से स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो यह राजनीतिक अटकाव के कारण राज्य के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को अपने-अपने मतभेदों को पार करके जनता के हित में एक स्थायी और सशक्त सरकार का निर्माण करना आवश्यक है।