पश्चिम बंगाल के राजनीति मंच पर फिर एक बार गड़गड़ाहट मची है। सलारिया कांग्रेस के नेता सुवेन्दु अधिकारी ने अपने भरोसेमंद सहयोगी चन्द्रनाथ राथ की हत्या को "पहले से सोची-समझी हत्या" कहकर सख़्त आरोप लगाए हैं और जनता से आग्रह किया है कि कानून को थामे रहने की बजाय शांति से स्थिति का विश्लेषण करें। यह बयान बिंदु-पर-बींदु, पश्चिम बंगाल की 24 परगना (उत्तर) ज़िला में हुए इस दुखद घटना के बाद आया, जहाँ राथ को असमय गोलीबारी में मार दिया गया। रात 5 दिसंबर को रात के करीब 9 बजे उत्तर 24 परगना के बड़ेलिया इलाके में चन्द्रनाथ राथ को घातक रूप से गोली मार दी गई। वह पहले सुवेन्दु अधिकारी के व्यक्तिगत सहायक के रूप में काम कर रहा था और कई वर्षों से उनके भरोसेमंद मसले‑सुलझाने वाले के रूप में पहचाना जाता था। राथ का पूर्व एअरफ़ोर्स में सेवा था, और उनका प्रोफ़ाइल एक प्रशिक्षित, सुदृढ़ और निष्ठावान राजनेता के हाथों में भरोसेमंद सहयोगी के रूप में बना था। इस हत्या को लेकर कई हाई‑प्रोफाइल राजनीतिक नेता एकत्रित हो गये, और सुवेन्दु अधिकारी ने तुरंत ही इस हत्या को "प्री‑प्लान्ड मर्डर" कहकर संस्थागत तौर पर निंदा की। सुवेन्दु अधिकारी ने झील के किनारे पेनालीटि इंटर्नेट के मौसम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें उन्होंने कहा, "हमारी टीम के इस सदस्य की हत्या को एम्बेडेड योजनाबद्ध हत्या कहा जाना चाहिए। हम सरकार से इकट्ठा करने का अनुरोध करते हैं कि इस मामले की पूरी जांच के लिये बीसीआई को शामिल किया जाय। साथ ही, जनता से अपील है कि वे हिंसा को समर्थन नहीं दे और कानून के अनुसार ही प्रतिक्रिया दें।" अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह सब कुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य में अराजकता और वैर की हवा बिखर रही है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से मांगा गा व्याख्यान में दोनों पक्षों ने प्रभावी कदम उठाने की मांग की। टीएमसी के नेता ने कहा कि इस हत्या की पूरी जांच में सीबीआई को शामिल किया जाना चाहिए और ऐसे मामले में जनता को न्याय की मांग का अधिकार है। आर्थिक टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि राथ को हुई मौत का संबंध एक बड़े अपराध नेटवर्क से हो सकता है, परन्तु पुष्टि अभी बाकी है। निष्कर्षतः, चन्द्रनाथ राथ की हत्या ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ले दिया है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति के जीवन का अंत है, बल्कि यह राजनीतिक संघर्ष, शक्ति का संग्राम और सामाजिक असंतोष को भी दर्शाती है। सभी वर्गों को मिलकर शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहिए, कानून के हाथों में भरोसा रखना चाहिए और हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए। तभी इस प्रकार की पूर्वनिर्धारित हत्याएँ रोकी जा सकेंगी और लोकतंत्र की सच्ची शक्ति का अभिव्यक्तिकरण हो सकेगा।