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जयपुर में एक दशक बाद लौट रहा ‘ऑक्टेव 2026’, पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति का होगा महाकुंभ

प्रतिष्ठित सांस्कृतिक उत्सव 'ऑक्टेव 2026' पूरे दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जयपुर में अपनी वापसी कर रहा है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 1 से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय महाकुंभ में पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों की अनूठी कला, संगीत और ख

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Kotputli News प्रकाशित: 01 Oct 2026, 07:30 AM
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जयपुर में एक दशक बाद लौट रहा ‘ऑक्टेव 2026’, पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति का होगा महाकुंभ
जयपुर में एक दशक बाद लौट रहा ‘ऑक्टेव 2026’, पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति का होगा महाकुंभ फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
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कला और संस्कृति प्रेमियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत, प्रतिष्ठित सांस्कृतिक उत्सव 'ऑक्टेव 2026' पूरे दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जयपुर शहर में अपनी भव्य वापसी करने जा रहा है। यह चार दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ आगामी 1 अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया जाएगा, जो इस क्षेत्र में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कलात्मक पुनरुत्थान के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संदर्भ पर नजर डालें तो, ऑक्टेव उत्सव ने हमेशा से पूर्वोत्तर भारत की विविध और सम्मोहक परंपराओं को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य किया है। पिछले एक दशक से राजस्थान भर के कला प्रेमी इस उत्सव की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे थे, जो अपने पिछले संस्करणों के दौरान पूर्वोत्तर के राज्यों की जीवनशैली, संगीत और विरासत की एक अनूठी और जीवंत झलक प्रदान करता रहा है।

जमीनी हकीकत और तार्किक व्यवस्थाओं की बात करें तो, चार दिवसीय इस बहुप्रतीक्षित उत्सव को अत्यंत व्यापक और व्यवस्थित रूप से प्लान किया गया है, जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठ राज्यों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। इस दौरान लोक एवं शास्त्रीय कला, संगीत, नृत्य, पारंपरिक परिधान, आभूषण, शिल्प और प्रामाणिक खानपान की भव्य प्रदर्शनियां सजाई जाएंगी, जिसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

हितधारकों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों और आयोजकों की प्रतिक्रियाओं के अनुसार, इस महोत्सव की वापसी को लेकर समाज के सभी वर्गों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय कारीगरों, सांस्कृतिक प्रेमियों और व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इस तरह के बड़े आयोजन न केवल पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने में मदद करते हैं, बल्कि दूर-दराज के कलाकारों को एक राष्ट्रीय मंच और उचित पहचान भी प्रदान करते हैं।

क्षेत्रीय प्रभाव के दृष्टिकोण से, इस वृहद सांस्कृतिक आयोजन का सकारात्मक असर राजधानी जयपुर के साथ-साथ कोटपूतली-बहरोड़ सहित आसपास के जिलों पर भी पड़ेगा। पड़ोसी क्षेत्रों के कला विद्यार्थियों, इतिहासकारों और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए यह आयोजन सांस्कृतिक शिक्षा, अध्ययन और आपसी मेलजोल का एक बेहतरीन माध्यम बनेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर भी सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में इस आयोजन को सफलतापूर्व संपन्न कराने के लिए विशेष समितियों का गठन किया गया है। स्थानीय प्रशासन और उत्सव के समन्वयकों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, मेहमानवाजी, और आगंतुकों की सुविधाओं से जुड़े सभी आवश्यक इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आगामी योजनाओं और भविष्य की रूपरेखा को देखते हुए, 1 अक्टूबर को होने वाले भव्य शुभारंभ के दिन हजारों की संख्या में गणमान्य नागरिकों, पर्यटकों और विद्यार्थियों के जुटने की संभावना है। तय समयसीमा के अनुसार सभी तैयारियां तीव्र गति से आगे बढ़ रही हैं, और आयोजकों का मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध बहुसांस्कृतिक विरासत को सहेजना तथा आपसी भाईचारे को और अधिक मजबूत करना है।

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