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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण पर दिया जोर, 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ रक्षा बजट

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना का आधुनिकीकरण समय की सबसे बड़ी जरूरत है और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 7.85

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Kotputli News प्रकाशित: 04 Nov 2026, 03:32 PM
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण पर दिया जोर, 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ रक्षा बजट
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण पर दिया जोर, 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ रक्षा बजट फोटो आभार: Amar Ujala Rajasthan Regional Wire
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐतिहासिक शहर जैसलमेर में आयोजित एक उच्च स्तरीय संसदीय समीक्षा बैठक के दौरान भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति के माननीय सदस्यों को संबोधित करते हुए मंत्री महोदय ने समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और तकनीकी प्रगति के अनुरूप राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। यह उच्च स्तरीय बैठक भारतीय सशस्त्र बलों के रणनीतिक मार्ग पर विचार-विमर्श करने और देश के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

ऐतिहासिक और परिचालन संदर्भ प्रदान करते हुए, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का रक्षा ढांचा अपनी विस्तृत सीमाओं पर बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर विकसित हुआ है। युद्धक हथियारों में तीव्र तकनीकी बदलावों, साइबर सुरक्षा, एयरोस्पेस विकास, नौसैनिक प्रभुत्व और जमीनी युद्ध की तैयारी के कारण आधुनिकीकरण की यह अनिवार्यता उत्पन्न हुई है। क्रमिक वित्तीय चक्रों के दौरान, नीति निर्माताओं ने यह महसूस किया है कि तकनीकी रूप से बेहतर सेना बनाए रखने के लिए निरंतर पूंजी निवेश, स्वदेशी विनिर्माण समर्थन और रणनीतिक संसाधन आवंटन की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह भारी-भरकम वित्तीय आवंटन पूंजीगत खरीद को बढ़ावा देने, पुराने हथियार प्रणालियों को उन्नत करने, घरेलू रक्षा उत्पादन के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और व्यापक तार्किक तैयारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। ये आंकड़े भारतीय सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक उपकरणों, उन्नत हथियारों और मजबूत तकनीकी सहायता प्रणालियों से लैस करने के प्रशासनिक संकल्प को रेखांकित करते हैं।

विचार-विमर्श के दौरान, संसदीय सलाहकार समिति के सदस्यों ने इन वित्तीय संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के संबंध में रचनात्मक चर्चाओं में भाग लिया। संसद सदस्यों, रक्षा रणनीतिकारों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने धन के बहु-क्षेत्रीय वितरण का मूल्यांकन किया, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध परियोजना निष्पादन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस चर्चा ने सैन्य तैयारी को प्राथमिकता देने और यह सुनिश्चित करने पर एक राष्ट्रीय आम सहमति को उजागर किया कि वित्तीय आवंटन सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर बेहतर परिचालन दक्षता में परिवर्तित हों।

यद्यपि यह उच्च स्तरीय बैठक जैसलमेर में आयोजित की गई थी, लेकिन बढ़े हुए रक्षा खर्च के रणनीतिक प्रभाव कोटपूतली-बहरोड़ सहित पूरे देश में महसूस किए जाते हैं। राष्ट्रीय रक्षा में रणनीतिक निवेश घरेलू औद्योगिक पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करते हैं, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देते हैं, स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को सुदृढ़ करते हैं और कुशल रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। विभिन्न जिलों के समुदाय राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं के प्रति देशभक्ति की भावना और बढ़ी हुई जागरूकता के साथ इन विकासक्रमों का अवलोकन करते हैं।

यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक निगरानी और संस्थागत चौकसी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि बढ़े हुए बजटीय आवंटन का कार्यान्वयन अत्यंत कुशलता और प्रक्रियात्मक अनुपालन के साथ हो। रक्षा मंत्रालय, संसदीय समितियों के साथ मिलकर, खरीद की समयसीमा, विकास के मील के पत्थर और स्वदेशी रक्षा उत्पादन लक्ष्यों की निगरानी के लिए कड़े मूल्यांकन ढांचे स्थापित करना जारी रखता है। इन प्रशासनिक तंत्रों को नौकरशाही की बाधाओं को दूर करने और महत्वपूर्ण तकनीकों को परिचालन सेवा में शामिल करने में तेजी लाने के लिए डिजाइन किया गया है।

भविष्य की ओर देखते हुए, जैसलमेर सलाहकार बैठक के दौरान तैयार किया गया रोडमैप भारत की दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों के लिए एक स्पष्ट मिसाल कायम करता है। जैसे-जैसे देश वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित वित्तीय प्रावधानों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, भारतीय सेना के त्वरित आधुनिकीकरण को लेकर जन अपेक्षाएं उच्च बनी हुई हैं। इन विचार-विमर्शों के दौरान लिए गए रणनीतिक निर्णयों से क्षेत्र में भारत की स्थिति एक मजबूत सुरक्षा आधार के रूप में सुदृढ़ होने की उम्मीद है, जो अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभु हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।

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