बाड़मेर के रेतीले धोरों की艱म जमीन से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली प्रेमलता दईया ने एक प्रेरणादायक सफलता हासिल की है। चौहटन उपखंड के अंतर्गत आने वाले नवातला जेतमाल गांव की रहने वाली प्रेमलता ने साबित कर दिया है कि यदि बुलंद हौसला हो तो भौगोलिक दूरियां और संसाधनहीनता सफलता के मार्ग में कभी बाधा नहीं बन सकतीं। वर्तमान में वह राजकीय कन्या महाविद्यालय बाड़मेर में बीए अंतिम वर्ष की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और उनकी यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।
प्रेमलता दईया की यह सफलता उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और संस्कारों का भी सुंदर परिणाम है। उनके पिता फोटाराम दईया एक शिक्षक के रूप में समाज को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं, जबकि उनकी माता हेमलता एक गृहिणी हैं। एक ऐसे सुसंस्कृत परिवार में पले-बढ़े होने के कारण प्रेमलता को बचपन से ही शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक सरोकारों का महत्व समझ में आया। ग्रामीण परिवेश की कठिनाइयों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा को निरंतर जारी रखा और महाविद्यालय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।
राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस के माध्यम से समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखने वाली प्रेमलता पिछले दो वर्षों से इस संगठन में अत्यंत सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। एनएसएस के शिविरों और गतिविधियों के दौरान उनके द्वारा दिखाए गए उत्कृष्ट नेतृत्व गुणों, अनुशासन और सेवा भाव ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। दो वर्षों की निरंतर मेहनत और समर्पण ने उन्हें कॉलेज स्तर से ऊपर उठकर क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया है।
राजकीय कन्या महाविद्यालय बाड़मेर के प्राचार्य मुकेश पचौरी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस प्रतिष्ठित चयन प्रक्रिया के तहत राजस्थान राज्य से कुल 58 स्वयंसेवकों का चयन इस महत्वपूर्ण शिविर के लिए हुआ है। हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित हो रहे इस नॉर्थ जोन प्री-आरडी कैंप में ये सभी स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि इस शिविर में राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्रतिभावान युवा अपनी कला, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस शिविर में प्रतिस्पर्धा का स्तर बेहद कड़ा और चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहीं से आगामी राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की रूपरेखा तय होती है। शिविर में भाग ले रहे राजस्थान के कुल 58 स्वयंसेवकों में से केवल शीर्ष 10 प्रतिभावान स्वयंसेवकों का ही चयन आगामी प्रक्रिया के अगले चरण के लिए किया जाएगा। इन श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 10 स्वयंसेवकों को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 30 दिवसीय राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस शिविर में भाग लेने का ऐतिहासिक अवसर प्राप्त होगा।
अपनी इस सफलता और आगामी चुनौतियों के संबंध में बात करते हुए प्रेमलता दईया ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा है कि उनका एकमात्र उद्देश्य अपने गांव, अपने महाविद्यालय और संपूर्ण बाड़मेर जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना है। फिलहाल उनका पूरा ध्यान गुरुग्राम में चल रहे शिविर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने और शीर्ष 10 में अपनी जगह पक्की करने पर केंद्रित है। उनकी यह प्रतिबद्धता अन्य ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं।
महाविद्यालय परिवार, उनके माता-पिता और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की शुभकामनाएं प्रेमलता के साथ हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी उन्हें हरसंभव प्रोत्साहन और मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी क्षमता का शत-प्रतिशत प्रदर्शन कर सकें। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद उत्साहजनक होगा कि ग्रामीण अंचल की यह बेटी दिल्ली के राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस शिविर तक का सफर तय करने में कितनी सफल होती है।