Kotputli News
संस्कृति एवं मेले

जालोर के बडगांव में पारंपरिक हस्तनिर्मित जूतियों की समृद्ध विरासत को संजोते कारीगर

जालोर के बडगांव की पारंपरिक जूतियां अपनी बारीक कढ़ाई, सुंदर डिजाइन और उत्कृष्ट कारीगरी के लिए विशेष पहचान रखती हैं। स्थानीय जूती कारीगर रमेश जीनगर बताते हैं कि चमड़े को आकार देने से लेकर उस पर कढ़ाई करने तक का सारा काम मशीनों के बजाय हाथों के हुनर से किया

K
Kotputli News प्रकाशित: 24 Sep 2026, 11:30 AM
⏱ 3 मिनट का समय • 👁 1,026 बार देखा गया
यह समाचार अंग्रेजी में भी उपलब्ध है: Read in English →
जालोर के बडगांव में पारंपरिक हस्तनिर्मित जूतियों की समृद्ध विरासत को संजोते कारीगर
जालोर के बडगांव में पारंपरिक हस्तनिर्मित जूतियों की समृद्ध विरासत को संजोते कारीगर फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
समाचार सुनें

0:00 / ~3:00
शेयर करें: 42 शेयर
WhatsApp Facebook

राजस्थान के जालोर जिले के सांस्कृतिक परिदृश्य में बडगांव की पारंपरिक जूतियां अपनी बेहतरीन कारीगरी, बारीक कढ़ाई और अनूठे सौंदर्य के कारण एक विशिष्ट पहचान रखती हैं। क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में गहराई से रमी ये पारंपरिक वस्तुएं पीढ़ियों से चले आ रहे चमड़े के काम और कलात्मक अभिव्यक्ति की सदियों पुरानी परंपराओं को दर्शाती हैं।

जालोर में इस पारंपरिक जूती निर्माण कला का ऐतिहासिक उद्गम उन प्राचीन सामुदायिक प्रथाओं से जुड़ा है, जहां कुशल कारीगरों ने कच्चे चमड़े को टिकाऊ और सुंदर जूतियों में बदलने की कला को परिष्कृत किया। दशकों के दौरान बडगांव पारंपरिक जूती निर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है, जिसने ऐसी तकनीकों को संरक्षित किया है जो स्थायित्व के साथ-साथ दृश्य सुंदरता को प्राथमिकता देती हैं।

जूती निर्माण की इस प्रक्रिया की जमीनी हकीकत का आकलन करने पर यह स्पष्ट होता है कि पारंपरिक जूतियों की एक जोड़ी तैयार करने में घंटों का समर्पित श्रम और अत्यधिक सटीकता की आवश्यकता होती है। साधारण चमड़े की बारीकी से जांच की जाती है, उसे काटा जाता है, आकार दिया जाता है और उसके बाद उस पर जटिल कढ़ाई और सुंदर डिजाइन तैयार किए जाते हैं।

इस पारंपरिक कला पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालते हुए स्थानीय जूती कारीगर रमेश जीनगर बताते हैं कि साधारण चमड़े को आकार देने से लेकर उस पर कढ़ाई और डिजाइन तैयार करने तक का पूरा काम बेहद सावधानी से किया जाता है। उनके व्यावसायिक दृष्टिकोण के अनुसार, मशीनों के बजाय कारीगरों के हाथों का हुनर इन जूतियों को खास बनाता है।

इस पारंपरिक शिल्प का संरक्षण जालोर और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। पारंपरिक आजीविका को बनाए रखकर यह क्षेत्र कारीगर परिवारों का समर्थन करता है, स्वदेशी ज्ञान के क्षरण को रोकता है और एक ऐसी स्थानीय आर्थिकी को बढ़ावा देता है जो औद्योगिकरण के बजाय पीढ़ियों के अनुभव पर आधारित है।

प्रशासनिक निकाय और स्थानीय सांस्कृतिक संगठन रमेश जीनगर जैसे पारंपरिक कारीगरों का समर्थन करने की आवश्यकता को तेजी से महसूस कर रहे हैं। संस्थागत सहायता, निष्पक्ष बाजार पहुंच और कौशल विकास के अवसर सुनिश्चित करने से बडगांव की जूतियों के उच्च मानकों को बनाए रखने में मदद मिलती है।

भविष्य की ओर देखते हुए इस पारंपरिक कला का निरंतर अस्तित्व युवा पीढ़ी के कारीगरों को प्रोत्साहित करने और जालोर की सीमाओं से परे इसकी बाजार पहुंच को बढ़ाने पर निर्भर करता है। कारीगरों के निरंतर समर्पण और सक्रिय सामुदायिक सहयोग से बडगांव की पारंपरिक कढ़ाई वाली जूतियां अपनी गौरवशाली विरासत को आने वाले वर्षों तक बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

Featured Creator Deep | @deepdrives.in
Deep | @deepdrives.in

📸 Deep | @deepdrives.in

🚗 Kotputli Ka Ladka • Car Creator

Real owner reviews, tested mileage & hidden car hacks! Join 10K+ automobile lovers.

K

Kotputli News

सत्यापित पत्रकार

कोटपूतली-बहरोड़ जिला संवाददाता एवं संपादकीय डेस्क

तथ्य-जांच सत्यापित

यह समाचार रिपोर्ट कोटपूतली न्यूज़ संपादकीय आचार संहिता के तहत प्रकाशित की गई है। यदि आपको इसमें कोई तथ्यात्मक त्रुटि प्रतीत हो तो सुधार हेतु संपर्क करें।

संबंधित खबरें

संस्कृति एवं मेले • 08 Nov 2026

दिवाली के पावन पर्व पर पारंपरिक बाजरा और तिल की मिठाइयों का बढ़ा रुझान

आगामी दीपावली के पावन पर्व को लेकर ग्रामीण और शहरी परिवारों में पारंपरिक व्यंजनों के प्रति रुझान लगातार बढ़ रहा है। बाजार की मिलावटी मिठाइयों के विकल्प के रूप में बाजरा, तिल और गुड़ से बनने वाली टिक्कियों को बेहद स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट माना जा रहा है

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,005
संस्कृति एवं मेले • 08 Nov 2026

मंडावा की ऐतिहासिक हवेलियों ने दीपोत्सव के दौरान फ्रांसीसी पर्यटकों का जीता मन

फ्रांस से आए पर्यटकों ने हाल ही में शेखावाटी के ऐतिहासिक क्षेत्र में दीपावली के पावन पर्व का आनंद लिया। मंडावा की भव्य हवेलियों और सुंदर भित्तिचित्रों का अवलोकन करते हुए इन विदेशी सैलानियों ने स्थानीय निवासियों के साथ खुशियां साझा कीं। यह सांस्कृतिक आदान-

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,008
संस्कृति एवं मेले • 08 Nov 2026

उदयपुर में महालक्ष्मी माता का भव्य श्रृंगार, दीपावली पर 3.50 लाख की साड़ी और कमल पुष्प अर्पित

उदयपुर में दीपावली के पावन पर्व पर महालक्ष्मी माता को 3.50 लाख रुपये मूल्य की विशेष रूप से तैयार सोने और चांदी के कार्य वाली साड़ी पहनाई गई। 125 कमल के फूलों से सजाए गए इस दिव्य और राजसी स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। इस भव्य

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,008
संस्कृति एवं मेले • 08 Nov 2026

दीपावली पर उदयपुर में 200 फीट लंबा लाइटिंग यूनिवर्स बना मुख्य आकर्षण, उमड़ी भीड़

दीपावली के पावन पर्व पर राजस्थान के उदयपुर में यूआईटी पुलिया के समीप स्थापित 200 फीट लंबा लाइटिंग यूनिवर्स पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है। उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार इस भव्य सजावट को देखने के लिए भारी भीड़ उम

⏱ 5 मिनट का समय 👁 1,011
K
कोटपूतली न्यूज़ ऐप इंस्टॉल करें

फास्ट लोडिंग व मोबाइल ऐप अनुभव

🍪

हम बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, विश्लेषण और प्रासंगिक विज्ञापनों (Google AdSense) के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति पढ़ें

✓ Success