सफ़दरजंग, दक्षिण दिल्ली – 30 वर्षों की आयु में दिल्ली के रुचिकर न्यायपालिका के एक उज्जवल तारे की जिंदगी अचानक एक रहस्यमयी और त्रासदीपूर्ण मोड़ ले गई। जज अमन कुमार शर्मा, जिनकी नियुक्ति 2022 में हुई थी, को घर पर लटका मिला, जिससे स्थानीय पुलिस ने मृत्यु के कारण को आत्महत्या बताया। यह खबर जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाई, तो समाज में गहरी चिंता और सवालों की लहर उठी। जज शर्मा का निधन 24 अप्रैल को हुआ, जब उनकी पत्नी ने सुबह घर में कुछ अजीब आवाजें सुनी और दरवाजे पर लटके हुए शरीर को देखा। पुलिस ने तुरंत स्थान पर पहुँच कर जांच शुरू की। प्रारम्भिक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जज ने खुद को फांसी दे दी। परंतु, जज के परिवार के सदस्य इस बात से असहमत हैं और दावा करते हैं कि जज ने अपने जीवन में कभी भी ऐसी निराशा नहीं दिखायी थी। उन्होंने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले, जज और उनकी पत्नी के बीच रोष बढ़ा था, लेकिन यह सिर्फ मामूली झगड़ा था, जिसका कोई गंभीर परिणाम नहीं निकला। जज अमन कुमार शर्मा की करियर यात्रा भी कम उल्लेखनीय नहीं थी। उन्होंने 2015 में बार में प्रवेश किया, और जल्दी ही अपनी स्पष्ट वाक्पटुता व न्यायप्रियता के कारण मान्यता पाई। 2020 में उन्हें मध्य अदालत में नियुक्ति मिली और दो साल बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय में जज की पदवी प्राप्त की। उनके कई बहुमूल्य निर्णयों ने सामाजिक न्याय को सुदृढ़ किया और उन्होंने कई संवैधानिक मुद्दों पर कठोर रुख अपनाया। उनके सहकर्मियों के अनुसार, जज हमेशा काम के प्रति समर्पित और ईमानदार थे, परंतु व्यक्तिगत जीवन में कभी-कभी तनाव का सामना करना पड़ता था, जैसा कि किसी भी पेशेवर के साथ हो सकता है। इस दुखद घटना ने न्याय प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को फिर से उजागर किया है। कई विशेषज्ञों ने कहा कि न्यायाधीशों को भी वही मानवीय भावनाएँ और तनाव का सामना करना पड़ता है, जैसे आम लोग। इसलिए, कोर्ट और न्यायालय प्रणाली को चाहिए कि वह मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष उपाय और समर्थन प्रदान करे, जैसे परामर्श सेवाएँ, कार्य‑भार में संतुलन, तथा सहकर्मियों के साथ खुला संवाद। यह तभी संभव होगा जब समाज में इस विषय पर खुली चर्चा होगी और स्वीकार किया जाएगा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल सामान्य जन के लिए नहीं, बल्कि उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अंततः, जज अमन कुमार शर्मा की मृत्यू ने न्यायिक समुदाय में गहरा शोक उत्पन्न किया है और साथ ही कई प्रश्न भी छूट गए। क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी या फिर किसी और कारण से हुई थी, इस पर आगे की जाँच जारी है। परिवार ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस मामले की पूरी और पारदर्शी जांच की जाए, ताकि सभी अस्पष्टताओं का समाधान हो सके। इस दुखद घटना से यह सीख मिलती है कि हम सभी को, चाहे वह कोई भी पेशा हो, अपने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।