जैसलमेर जिले के एक शांत पर्वतीय गांव में नौका यात्रा को लेकर उठी उत्सुकता, दो रातों में त्रासदी में बदल गई। बाढ़ के बाद जलस्तर घटने के कारण नदी में कई छोटी-छोटी नौकायें चलाने का प्रचलन था, पर इस बार खराब मौसम और जीवनरक्षक जैकेट न मिलने ने इस सैर को घातक बना दिया। स्थानीय पर्यटन संघ ने बिना कोई चेतावनी दिए यात्रियों को नौका में सवार किया, जबकि मौसम विभाग ने तेज हवा और बवंडर के खतरे की चेतावनी जारी की थी। परिणामस्वरूप, नाव उलट गई और पानी में डूबते ही कई यात्रियों की जान चली गई। इस दुःखद घटना के सबसे मार्मिक पहलू को तब उजागर किया गया जब एक डाइवर ने पानी के नीचे माँ और उसके तीन साल के बेटे को पकड़े हुए पाया। दोनों ने आपस में गले-लगाकर शरारती मुस्कुराहट के साथ अपने अंतिम क्षण को साझा किया, जिससे सामने वाले सभी को आँसू आ गये। डाइवर ने बताया कि वह नाव को बचाने के प्रयास में पानी में उतरता रहा, तभी उसने यह दृश्य देखा। बचाव दल के कई सदस्य और जलदुर्घटना विशेषज्ञ इस दृश्य को देखकर हैरान रह गये, क्योंकि ऐसे भावनात्मक बंधन का फोटो अक्सर केवल फुर्सत के समय में ही मिलते हैं, न कि मौत के क्षण में। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत इस मामले की पूरी जांच का आदेश दिया। कई गवाहों के बयान से पता चलता है कि नाव में सफरियों को जीवनरक्षक जैकेट नहीं दी गयी थी, जबकि सुरक्षा नियमों के तहत यह अनिवार्य होता है। इसके अलावा, नाव के चालक ने भी उचित सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर जिम्मेदारी को अनदेखा किया, जिससे कई लोगों ने इसे लापरवाही बताया। इस त्रासदा पर उजागर हुए कई सवालों के बीच, सरकार ने इस वर्ष के अंत तक सभी पर्यटन यात्रा के लिए अनिवार्य जीवनरक्षक जैकेट का प्रावधान करने की घोषणा की है। इस दुखद घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। माँ‑बच्चे की इस गहरी स्नेहभरी छवि ने सभी को याद दिलाया कि जीवन की नाजुकता को समझते हुए हर छोटी सी सावधानी को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस घटना से सीख लेकर, भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए कड़े नियम और सख़्त निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए।