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Breaking News: जबलपुर नौका दुर्घटना: माँ‑बेटे को एक ही जीवनजैक्ट में बांधकर डुबो दिया, मंत्री आँसू बहाते हुए
🕒 2 hours ago

जबलपुर में एक साहसी पर्यटन यात्रा दुर्दशा में बदल गई, जब एक क्रूज़ बोट में सवार एक माँ और उसका त्रिवर्षीय बालक एक ही जीवनजैक्ट में बंधे हुए मिले। बोट का क्षणिक टूटना और तेज़ हवाओं का प्रकोप दोनों को पानी में फेंक दिया, जिससे वे जीवित रहने के लायक कोई साधन नहीं पा सके। यद्यपि बोट पर अन्य यात्रियों को जीवनजैक्ट प्रदान किया गया था, इस त्रासदी में जीवनजैक्ट की कमी ही बड़ी समस्या बनकर सामने आई। स्थानीय पुलिस ने बताया कि बोट से निकाली गई पक्की पत्थर वाली जगह पर तेज़ हवाओं के कारण बोट का ऊँचा भाग टूट गया। यह हादसा तब हुआ जब माँ और उसका छोटा पुत्र सैर‑सपाटा के लिए बोट में सवार थे। बचाव दल को मौके पर तुरंत सूचित किया गया, परन्तु पानी की तेज़ धारा और अंधेरे की वजह से उनका पता चलना लगभग दो घंटे तक देर से ही संभव हुआ। जब बचाव टीम ने उन्हें खोजा, तो माँ और पुत्र दोनों एक दूसरे को कस कर पकड़े हुए, जीवनजैक्ट के बिना घिनौने पानी में लाथ मार रहे थे। उनकी बेरहम हालत को देख उत्तरी मध्य प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने तब रोते हुए कहा कि यह घटना उनके दिल पर ऐसे गहरी चोट लगी है जैसे अपने ही परिवार को खो दिया हो। इस दुर्घटना में कई प्रश्न उभर कर सामने आए। पहले तो बोट की सुरक्षा मानकों की जाँच करने की आवश्यकता है, क्योंकि बोट पर पर्याप्त जीवनजैक्ट नहीं थे। इसके अलावा, अत्यधिक मौसम में नाविकों को यात्रा रोकने की चेतावनी भी नहीं दी गई थी, जिससे मौसम के अचानक बदलने पर यात्रियों को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ा। माँ‑बेटे का यह दर्दनाक अंत, किन्ही भी जोखिमपूर्ण जल क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की गंभीरता को उजागर करता है। दुर्घटना के बाद, राज्य सरकार ने तत्काल जांच का आदेश दिया है और सभी पर्यटन बोटों को दोबारा निरीक्षण करने का निर्देश जारी किया है। साथ ही, समुद्री सुरक्षा नियमों की सख्त पालना सुनिश्चित करने के लिए जीवनजैक्ट की पर्याप्त सप्लाई और उचित कार्यशालाओं का आयोजन भी कहा गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है, यदि यात्रियों को पूर्व सूचना दी जाए और बोट संचालन में मौसम के हिसाब से लचीलापन अपनाया जाए। अंत में, यह घटना हमें यह सिखाती है कि जल सुरक्षा केवल प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि व्यक्तिगत चेतना का भी हिस्सा है। हर यात्रा से पहले मौसम की जानकारी, बोट की स्थिति और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की जाँच अनिवार्य होनी चाहिए। इस दुखद क्षण ने कई दिलों को छू लिया है, और आशा है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिये कड़े कदम उठाए जाएंगे, ताकि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जा सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 May 2026