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Breaking News: जबलपुर की कश्ती हादसे में नौ जीवित बचाव: मौत के पीछे की सच्चाई और दुखदायक कहानी
🕒 1 hour ago

जबलपुर, मध्य प्रदेश में कल शाम को बर्गी नहर के किनारे एक पर्यटन कश्ती का डुबकी से फट जाना सभी को चौंका गया। यह कश्ती नौ यात्रियों को ले जा रही थी, जब अचानक तेज़ हलचल और मोटर की खराबी के कारण कश्तियों का तिरछा हो जाना शुरू हुआ। जल में फंटी कश्ती को बचाने के प्रयास में स्थानीय प्रशासन ने तुरंत बचाव दल, पुलिस और जल सुरक्षा टीम को तैनात किया। किनारे पर मौजूद लोगों ने तुरंत जीवनरक्षक जाकेट्स बांटकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की, परंतु कई यात्रियों ने पानी में डूबते समय अपने साथी को थामे रखा, जिससे बंधे हुए शरीर मिले। कुल नौ लोगों की मृत्युदंड हुई, जिनमें एक माँ और उसका पुत्र भी शामिल थे, जिनकी लाशें जीवनरक्षक जाकेट में एक साथ पाई गईं। हादे की जांच से पता चला कि कश्ती की सुरक्षा मानकों का पूरा उल्लंघन किया गया था। कश्ती में आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण, जैसे पर्याप्त जीवनरक्षक जाकेट और फर्जी पंक्तियों, नहीं थे। चालक ने अचानक मोटर की समस्या को नोटिस करने पर सही समय पर रोक नहीं लगाई, जिससे कश्ती का टर्न ओवर होना अनिवार्य हो गया। स्थानीय प्रशासन ने यह भी बताया कि कश्ती को अधिक यात्रियों के साथ चलाया गया था, जबकि नियत क्षमता से दो गुना अधिक लोग सवार थे। इस कारण कश्ती अस्थिर हो गई और अंततः डुबकी मार ली। इस त्रासदी के बाद प्रधान मंत्री ने शोक व्यक्त किया और मृदु शब्दों में पीड़ित परिवारों के साथ अपने हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त कीं। केंद्र और राज्य सरकार ने तुरंत आपातकालीन सहायता प्रदान करने का वचन दिया और इस प्रकार के दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियामक कदमों की घोषणा की। जल सुरक्षा दल ने इस घटना को सीख के रूप में लेकर सभी पर्यटन कश्तियों पर नियमित निरीक्षण करने का आश्वासन दिया। हादे के बाद स्थानीय लोगों ने भी शोक किया और पीड़ितों के परिवारों को सांत्वना देने के लिए एकत्रित हुए। कई लोगों ने बताया कि कश्ती पर सवार होने से पहले उन्हें सुरक्षा नियमों के बारे में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला था, और जीवनरक्षक जाकेट के उपयोग के बारे में भी अनभिज्ञता रही। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि जल पर्यटन में सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखना कितना आवश्यक है। अंत में कहा जा सकता है कि जगलपुर की इस कश्ती दुर्घटना ने हमें यह सिखाया कि जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता, यात्रियों की क्षमता का सही आकलन और चालक की तत्परता ही जल सुरक्षा की मूलभूत स्तंभ हैं। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए नियामकों को कड़ाई से लागू करना होगा, और जनता को भी अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। यह दुःखद घटना हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा को नजरअंदाज करने से अनिवार्य रूप से जीवन की कीमत चुकानी पड़ती है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 May 2026