केरला विधानसभा चुनाव 2026 के लाइव कवरेज के दौरान मंत्री रियास ने एक साहसिक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के आँकड़े चाहे जो भी दिखाएँ, उनका राज्य की वास्तविक राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका मानना है कि कोडिंग के बाद वापस लफड़ी (डावोफ्रंट) गठबंधन सत्ता में आ जाएगा। इस बयान से कई राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाते हुए कहा कि एग्जिट पोल सिर्फ एक अनुमान है, लेकिन मतदाता व्यवहार, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय मुद्दे असली जीत तय करेंगे। रियास ने यह भी स्पष्ट किया कि केरल की राजनीति में सामाजिक न्याय, विकास कार्य और धार्मिक सामंजस्य हमेशा मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि लफड़ी गठबंधन ने पिछले पाँच सालों में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचा के क्षेत्र में कई कदम उठाए हैं, जिससे उनका समर्थन अभी भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बना हुआ है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों की नई गठजोड़ और अभियान रणनीतियों के बावजूद, रियास का भरोसा है कि जनता का भरोसा लफड़ी पर ही रहेगा। एग्जिट पोल की फाइलें, जो विभिन्न मीडिया हाउस ने तैयार की हैं, उनमें कुछ शहरी क्षेत्रों में विपक्षी गठबंधन को बढ़त दिखाने का संकेत मिला है, परंतु ग्रीन अल्पसंख्यक और आदिवासी इलाकों में लफड़ी की गहरी जड़ें दिखी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एग्जिट पोल की सटीकता पर हमेशा सवाल रहे हैं, क्योंकि केरल के मतदाता बहुत ही सूचित और स्वतंत्र होते हैं, जो अक्सर चुनाव परिणाम को अप्रत्याशित मोड़ दे सकते हैं। इस कारण रियास का दावा कि एग्जिट पोल महत्वपूर्ण नहीं हैं, राजनीति के बदलते परिदृश्य को दर्शाता है। भविष्य की दिशा का अनुमान लगाने के लिए अब तक के सर्वेक्षण और विगत चुनावी आंकड़े दिखाते हैं कि केरल में विकास कार्य, धारा 370 के समर्थन और स्थानीय स्वायत्तता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। यदि लफड़ी इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से पुश करता है, तो उनके जीतने की संभावना बढ़ेगी। विपक्षी गठबंधन को अब अपने जनसम्पर्क को और अधिक मजबूत करना होगा, विशेषकर युवा वर्ग और नयी दिल्ली की नीतियों को लेकर उनके विचारों को समझना होगा। विचारधारा के इस जंग में एग्जिट पोल सिर्फ एक संकेतक है, जबकि वास्तविक मतदाता निर्णय अंततः अपने व्यक्तिगत अनुभव और अपेक्षाओं के आधार पर करता है। अतः, चुनावी परिणाम का वास्तविक सपोर्टर बनाना, नीति निर्माताओं की क्षमताओं और जनता के भरोसे पर निर्भर करेगा। जैसे ही मतगणना का राउंड शुरू होगा, हर पार्टी को अपने संकल्पों को साबित करने का मौका मिलेगा, और केरल के नागरिक तय करेंगे कि लफड़ी की सत्ता फिर से स्थापित होगी या नई राजनीतिक दिशा निर्धारित होगी।