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Breaking News: दिल्ली हाईकोर्ट में वर्चुअल सुनवाई के दौरान दिखा अभद्र पोर्नोग्राफिक कंटेंट, न्यायाधीश की शर्ते में अराजकता
🕒 1 hour ago

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक अनचाहा और अभद्र पोर्नोग्राफिक क्लिप स्क्रीन पर चलकर सभी उपस्थितियों को चौंका दिया। यह घटना तब हुई जब एक पक्ष के वकील ने वीडियो कांफ़्रेंस में शेयर करने की अनुमति ली थी, लेकिन उसका इरादा स्पष्ट नहीं था। तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह अश्लील सामग्री कोर्ट की लाइव स्क्रीन पर प्रदर्शित हुई, जिससे सुनवाई में तीव्र व्यवधान उत्पन्न हुआ और न्यायालय के कर्मचारियों व न्यायाधीश को तुरंत कार्यवाही करनी पड़ी। घटना की विस्तृत जांच के बाद पता चला कि यह सामग्री एक बाहरी व्यक्तियों द्वारा सत्र के दौरान लिंक भेजकर या स्क्रीन शेयरिंग के माध्यम से डाल दी गई थी। इस अनजाने अपराध ने कोर्ट की सुरक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया। न्यायाधीश ने तुरंत स्क्रीन को बंद कर दिया और संबंधित पक्ष को आरोपित कर दिया। फिर भी, सुनवाई के दौरान इस अभद्र सामग्री के दोहराव ने कोर्ट के तकनीकी सपोर्ट टीम को बाध्य किया कि वह सभी डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा को सुदृढ़ करे। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटना का दोहरा पहलू है: पहला, डिजिटल सुनवाई में तकनीकी सुरक्षा का अभाव, और दूसरा, इस तरह के मामलों में सामुदायिक नैतिकता का उल्लंघन। उन्होंने कोर्ट को सलाह दी कि सभी प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए और ऑनलाइन मीटिंग प्लेटफ़ॉर्म पर दो-स्तरीय प्रमाणीकरण लागू किया जाए। इसके अलावा, अधिनियम के तहत आपराधिक दवा धारा ७० (भौतिक दुर्घटना) के तहत ऐसे कृत्यों को दंडित करने के लिए कड़ी सज़ा का प्रस्ताव भी किया गया। इस घटना पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी तीव्र रही। सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने इस अनैतिक कार्य की निंदा की और न्यायालय की तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की। कई मानवाधिकार संगठनों ने भी कहा कि इस प्रकार की सामग्री का प्रसारण केवल न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित नहीं करता, बल्कि सामाजिक नैतिकता को भी क्षति पहुँचाता है। इस बीच, न्यायालय ने शीघ्र ही एक विशेष समिति बनाई है, जो इस घटना की जांच करेगी और भविष्य में समान घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम निर्धारित करेगी। अंत में, यह घटना डिजिटल युग में न्यायालयीय प्रक्रियाओं की चुनौतियों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वर्चुअल सुनवाई की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, तकनीकी सुरक्षा, डेटा संरक्षण और नैतिक दिशा-निर्देशों को सुदृढ़ करना अनिवार्य हो गया है। न्यायपालिका को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी अभद्र सामग्री फिर कभी कोर्ट की स्क्रीन पर न दिखे, ताकि न्याय की शुद्धता और जनता का भरोसा निरन्तर बना रहे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 29 Apr 2026