भाजपा ने हाल ही में अपने राजनैतिक मंच से एक नई छवि पेश की है, जिसमें उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नए एस्टेट "शीश महल 2" की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। यह कदम भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य केजरीवाल को "रहमान डाकैत" के रूप में दर्शाकर उनकी छवि को धूमिल करना है। पार्टी ने इन तस्वीरों को बड़े ही नाटकीय ढंग से पेश किया, जिससे इंटरनेट पर तेजी से बहस छिड़ गई। कई रिपोर्टों में बताया गया कि ये तस्वीरें पिंटरेस्ट जैसी साइटों से ली गयी हैं और मूल रूप से किसी भी सरकारी या निजी परियोजना की नहीं हैं। इन चित्रों के साथ भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल ने इस बंगलों को निजी धन से निर्मित कराया है, जबकि उनका दावा है कि यह सार्वजनिक फंड से निर्मित हुआ है। यह मुद्दा कई प्राथमिक समाचार पोर्टलों द्वारा उजागर किया गया, जहाँ बताया गया कि "शीश महल 2" के डिजाइन और आर्किटेक्चर के बारे में कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। विपक्षी पार्टी के कई सदस्य, विशेषकर आम आदमी पार्टी (आप) ने तुरंत इस आरोप को नकारते हुए कहा कि यह एक "फेक" और "झूठी" प्रचार यात्रा है, जिसका उद्देश्य केजरीवाल की लोकप्रियता को कमजोर करना है। आप के सांसद अतिशी ने भी कहा कि ये चित्र पिंटरेस्ट से लगे हुए हैं और उनका कोई वैध स्रोत नहीं है। इस विवाद के बाद विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस हुए। भाजपा के कई रिश्तेदार नेताओं ने सोशल मीडिया पर "शीश महल 2" को लेकर कई मीम्स और निंदात्मक पोस्ट किए, जिसमें केजरीवाल को "रहमान डाकैत" कहा गया। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जैसे कि अनुज जैन और रागव चढ़ा ने इस आरोप का खंडन किया और कहा कि यह एक झूठी साजिश है, जिसका लक्ष्य जनता को भ्रमित करना है। कई मीडिया विश्लेषकों ने भी इस आलोचना को अति तर्कसंगत बताया, यह दर्शाते हुए कि राजनीति में अक्सर ऐसी अफवाहें और छवि संचालन देखे जाते हैं। कुल मिलाकर, "शीश महल 2" को लेकर इस विवाद ने यह फिर से साबित कर दिया कि भारतीय राजनीति में सार्वजनिक मामलों को लेकर झूठी खबरों और फेक इमेज का प्रयोग कितना आम हो गया है। भाजपा द्वारा जारी किए गये चित्र और उनके साथ जुड़े आरोपों ने जनता में गहरी उलझन पैदा कर दी है, जबकि आप का कहना है कि यह सभी झूठी प्रचार प्रसार का हिस्सा है। इस प्रकार के विवादों में जनता को सच और झूठ के बीच अंतर करने की आवश्यकता है, ताकि वे सार्थक मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सही निर्णय ले सकें।