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Breaking News: अमेरिका‑इज़राइल‑लेबनान ने पाँचवीं मुलाक़ात के बाद त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौता किया
🕒 1 hour ago

वाशिंगटन में चल रही पाँचवीं चर्चा के बाद अमेरिकी, इज़राइली और लेबनानी पक्षों ने एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौता किया, जो मध्य‑पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते में इज़राइल के उत्तर-लेबनान सीमावर्ती क्षेत्रों से भारतीय सेना (आईडीएफ) की क्रमिक वापसी, सीमा पर निगरानी को सुदृढ़ करने हेतु संयुक्त सुरक्षा तंत्र की स्थापना, तथा अफ़्रीकी इराकी जलस्रोत पर आर्थिक सहयोग के पहलू शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर इज़राइल के प्रधानमंत्री और बेज़ीक़ तेल्पी (लेबनान के राष्ट्रपति) तक सभी ने इस समझौते को "शांति की नई राह" कहा। समझौते के मुख्य बिंदु यह है कि इज़राइल ने लेबनान के दक्षिणी क्षेत्र में अपने कुछ बशर्ता सैन्य ठिकानों को क्षैतिज रूप में हटाने का वचन दिया है, जिसका उद्देश्य सीमा के निकट हिज़्बुल्लाह द्वारा किए जाने वाले हमलों को कम करना है। इसके बदले में लेबनान ने इज़राइल के साथ सीमा पार निगरानी के लिए उच्च तकनीकी ड्रोन और सेंसर नेटवर्क स्थापित करने के लिए सहमति व्यक्त की, जो दोनों पक्षों को संभावित खतरों का प्रारम्भिक चेतावनी देगा। अमेरिकी प्रतिनिधि दल ने इस प्रक्रिया में वित्तीय समर्थन और तकनीकी सहायता की पेशकश की, जिससे इस समझौते की सफलता के लिए आवश्यक संसाधन सुनिश्चित हो सकें। हालांकि इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सराहना मिली है, लेकिन लेबनान के भीतर इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी जा रही हैं। हिज़्बुल्ला ने इस समझौते को "भ्रष्ट राजनीति" का लेबल लगाते हुए खारिज कर दिया और कहा कि यह लेबनान की संप्रभुता को जोखिम में डालता है। अन्य राजनीतिक दल और नागरिक समाज ने इस समझौते को शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना है, लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस समझौते का कार्यान्वयन पारदर्शी एवं न्यायसंगत होना चाहिए। आगे चलकर इस समझौते के प्रभाव को क़रीब से देखना होगा, क्योंकि इससे न केवल इज़राइल-लेबनान सीमा पर स्थिरता आ सकती है, बल्कि मध्य‑पूर्व में अमेरिकी कूटनीति को भी नई दिशा मिल सकती है। यदि सभी पक्ष इस फ्रेमवर्क का पालन करते हैं, तो यह क्षेत्र में जारी तनाव को घटाकर आर्थिक विकास और सामाजिक सहयोग को प्रोत्साहित कर सकता है। अंततः, इस समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, और क्या सभी पक्ष इसे सम्मान और भरोसे के साथ निभाते हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 26 Jun 2026