लोहगड़ किले में घटित दु:खद घटना ने फिर से शोक और उलझन को बुलंद किया है। हाल ही में इस किले के पास के जंगल में 23 वर्ष के केतन अग्रवाल की हत्या की सच्चाई का पर्दा धीरे-धीरे खुल रहा है। प्रारम्भ में यह माना गया था कि केतन के साथ उसके प्रियतम सीता गोयल और चेतन चौधरी की नियति जुड़ी हुई थी, पर नई जांच ने खामियों और झूठे दावों को उजागर किया है। परिचित स्रोतों के अनुसार, केस की शुरुआती जांच में पता चला कि सीता और चेतन ने केतन के साथ एक रोमांचक साहसिक यात्रा की योजना बनाई थी, जिसके दौरान एक झरने के किनारे के पास के दर्दनाक ठिकाने पर केतन को मार दिया गया। इस घटना के बाद, दोनों ने आपस में आपस में कोटा के बारे में एक-दूसरे पर दोषारोपण शुरू कर दिया। चेतन ने दावा किया कि सीता ने केतन को मारने की पहल की, जबकि सीता ने जवाब दिया कि चेतन ही असली कारीगर था। इस प्रकार दोनों के बीच की टकराव ने जांच को और भी जटिल बना दिया। एनडीटीवी के एक विशेष रिपोर्ट में बताया गया कि सुरक्षा गार्ड ने सीता के पहेलीवाले शब्दों को उजागर किया, जिसमें उन्होंने कहा था, "मैं इसे नहीं कर सकती थी, लेकिन उसे मारना ही पड़ेगा"। इस बयान ने उनकी आत्मीयता को और अधिक संदेहास्पद बना दिया। वहीं, द हिंडू द्वारा प्रकाशित एक लेख में कहा गया कि केतन को चट्टान से धकेलने की घटना में दोनों के हाथ थे, लेकिन यह तय नहीं किया जा सका कि किसका काम अधिक था। पुने में एक कैफ़े में केतन की हत्या से पहले नियोजित साजिश की बात भी सामने आई, जैसा कि इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया। पुलिस ने बताया कि चेतन ने केतन को मारने के लिए एक योजना तैयार की थी और सीता ने उसे साथ मिलकर अंजाम दिया। इसके बाद, द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि दोनों ने हत्याकर्ता बनकर खुद को एक-दूसरे से बचाने की कोशिश की, परंतु अंततः दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इन सभी पहलुओं को देखते हुए, अब यह स्पष्ट हो रहा है कि लोहगड़ किले में घटित इस त्रासदी में केवल प्रेम का कोई तत्व नहीं था, बल्कि दो लोगों के बीच घटी हुई गहरी वैरता और धोखा ही इसके मुख्य कारण हो सकता है। पुलिस अभी भी साक्ष्य इकट्ठा कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारियों में लगी हुई है। इस मामले की गहराई को समझने के लिए समय के साथ और अधिक तथ्यों का प्रकाशन होगा, जो इस रहस्य को सुलझाने में मदद करेगा।