जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में 12 अगस्त को एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब भारतीय सेना के लगभग चालीस जवानों ने स्थानीय पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया और पुलिस अधिकारियों को शारीरिक तौर पर बेइज्जत करने का प्रयास किया। इस अकारण हमले के बाद पुलिस ने तुरंत मामले की पुरी जाँच के लिए FIR दर्ज की, जिसमें कई सेना की उच्च रैंक वाले अधिकारियों को भी आरोपी बना दिया गया। घटना से पहले किश्तवार में बढ़ते सुरक्षा तनाव और स्थानीय जनता के बीच बढ़ती असंतुष्टि को देखते हुए, पुलिस ने कई बार क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की थी। परन्तु इस मांग के बावजूद, यह समूह लगभग दो घंटे तक पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा रहा और फिर तीव्र रूप से कमरे में घुसकर पुलिस कर्मियों के साथ शारीरिक टकराव में लिप्त हो गया। कई पुलिस अधिकारी इस भीड़ में घायल हुए, जिनमें एक वरिष्ठ अधीक्षक ने गंभीर चोटें झेली। स्थानीय पुलिस अवकाश के बाद भी मामले की गंभीरता को समझते हुए, तुरंत एंटी-टेररिस्ट यूनिट (ATU) और सेना के अनुशासनिक विभाग को सूचित किया गया। एटीयू ने पता लगाया कि इस हमले की योजना कुछ उच्च रैंक वाले सेना कर्मचारियों ने बनाई थी, जो स्थानीय जनसंख्या के खिलाफ पुलिस के नियंत्रण को चुनौती देना चाहते थे। इस दौरान, पुलिस ने कई सैन्य वाहन और हथियारों को भी जब्त कर लिया, जिससे यह साबित होता है कि इस कार्रवाई में एक संगठित साजिश चल रही थी। इस घटना के बाद दिल्ली में रक्षा मंत्रालय ने गंभीर बयान देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी सफाई के साथ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आर्थिक न्यायालय ने भी इस मामले में त्वरित जांच का आदेश दिया है, व इस दिशा में कई संदिग्ध सैनिकों को हिरासत में ले लिया गया है। अंत में, इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि सुरक्षा बलों के बीच आपसी सहयोग और सम्मान का अभाव कई बार गंभीर सामाजिक अशांति को जन्म दे सकता है। स्थानीय लोगों ने इस घटना पर गहरी चिंता प्रकट की है और उन्होंने पुलिस तथा सेना से अपील की है कि वे मिलकर क्षेत्र की शांति को बहाल करने के लिए कार्य करें। यह मामला अब अदालत के सामने है, जहाँ सभी आरोपियों को अपना बयान देना होगा और न्याय के तले लाया जाना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी अनिंद्य घटनाओं को रोका जा सके।