टीजनिया में राजनीतिक तनाव के बीच, ट्राइब्यूडन मैनिया (टीएमसी) की सांसद मौहा मोइत्रा ने हालिया बयानों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुबिंदु अधिकारी के प्रति उनके प्रशंसा भरे शब्दों को लेकर कई पक्षों ने "बज़" और "रॉइंग" की मार करी, जबकि मोइत्रा ने इसे सर्वथा अस्वीकार करते हुए कहा, "जूस वाले हिस्से मत चुनो"। इस बयान ने सामाजिक मंचों पर तीव्र चर्चा को जन्म दिया और टीएमसी के भीतर फटने वाली खींचतान को और स्पष्ट किया। उनके इस बयान का मूल कारण था सुबिंदु अधिकारी को बेंगलुरु के मुख्यमंत्री के रूप में प्रशंसा देना, जिससे पार्टी के भीतर बंटवारे की जलन बढ़ी। मौहा मोइत्रा ने घोषणा की कि उनका सुबिंदु अधिकारी के साथ भावनात्मक जुड़ाव है, और उन्होंने कई बार कहा कि "मैंने पूरी रात रोया, लेकिन वह मेरे साथ खड़े रहे"। उनके शब्दों को कुछ लोग टीएमसी के भीतर दरार को बढ़ावा देने के इरादे से देख रहे थे, जबकि अन्य ने इसे एक साधारण राजनीतिक कड़वीपन के रूप में माना। मुख्य बात यह है कि मोइत्रा ने 'बज़' शब्द को नकारते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक उलझनों की नाटकीयता है, न कि वास्तविक समस्याओं का समाधान। इस बीच, टीएमसी के अन्य नेता फिर्हाद हाकिम ने सुबिंदु अधिकारी की विकास योजनाओं की सराहना की, जिससे पार्टी के भीतर दो ध्रुवीय विचार स्पष्ट हो गए। इस विवाद की जड़ में टीएमसी के अंदर हिस्सेदारी और नेतृत्व के सवाल छिपे हैं। सुबिंदु अधिकारी के प्रशंसा पर मोइत्रा की तीखी प्रतिक्रिया ने इस बात को उजागर किया कि पार्टी के भीतर भी कई वर्गों में असंतोष है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से टीएमसी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि यह जनता के समक्ष पार्टी के आंतरिक झगड़ों को उजागर करता है। साथ ही, इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया, जहाँ कई प्रमुख समाचार माध्यमों ने इस पर विस्तृत रिपोर्टिंग की। समापन में कहा जा सकता है कि मौहा मोइत्रा की यह प्रतिक्रिया केवल व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि टेम्परल राजनीतिक गणना का हिस्सा है। "जूस वाले हिस्से मत चुनो" जैसे शब्दों से वह यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि राजनीति में केवल चमक-धमक नहीं, बल्कि गहरी विचारधारा और वास्तविक योजना की आवश्यकता है। आगे देखते हुए, यह देखना रहेगा कि यह विवाद टीएमसी के भविष्य को कैसे प्रभावित करता है और क्या सुबिंदु अधिकारी के समर्थन में इस तरह की प्रशंसा जारी रहेगी या पार्टी के भीतर नई समझौते का रास्ता निकलेगा।