भारत सरकार ने विदेशी दान नियमों (एफसीआरए) को सख्त करते हुए गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिये नई बाध्यताएँ लागू कर दी हैं। यह कदम विदेशी निधि से संचालित संस्थाओं की पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा हेतु उठाया गया है। नई दिशानिर्देशों के तहत, सभी एनजीओ को अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स का खुलासा करना अनिवार्य किया गया है और इन्हें केवल घोषित कार्यक्षेत्र तक ही सीमित रखना होगा। राजनीति के संबंध में कोई भी सामग्री पोस्ट करना, अभियोजन करना या प्रचार करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। नई व्यवस्था का मुख्य बिंदु यह है कि एनजीओ को अपना उद्देश्य, कार्यक्षेत्र और फुर्सत के अनुमानित क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से लिखित में बताना होगा। सरकार ने कहा है कि इस प्रकार की जानकारी को सार्वजनिक करने से विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण बेहतर होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लीग से बचाया जा सकेगा। एनजीओ को अब अपने खातों की सूची, जिनमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं, को वार्षिक रिपोर्ट में शामिल करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, इन प्लेटफ़ॉर्म पर केवल वही सामग्री पोस्ट करने की अनुमति होगी जो संगठन के स्थापित उद्देश्यों से सम्बंधित हो। यदि किसी एनजीओ ने राजनीतिक टिप्पणी, चुनावी समर्थन या किसी राजनीतिक दल की आलोचना जैसी सामग्री प्रकाशित की, तो उसे एफसीआरए के तहत दंडित किया जा सकता है। यह प्रतिबंध विशेष रूप से उन संस्थाओं को लक्षित करता है जो विदेश से निधि प्राप्त कर के राष्ट्रीय राजनीति में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर सकती हैं। अब सरकार इन नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना, प्रवर्तन, या निधि प्राप्ति के अधिकारों को रद्द करने का अधिकार रखेगी। एनजीओियों ने इस कदम को दोधारी तलवार कहा है। एक ओर वे पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार की ओर योगदान को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर वे यह बता रहे हैं कि इस प्रकार की कठोर निगरानी से सामाजिक कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है और वे अपने कार्यों को स्वतंत्र रूप से संचालित नहीं कर पाएंगे। कई बड़े नागरिक समाज समूहों ने सरकार से आग्रह किया है कि यह नया प्रावधान अंतर्दृष्टिपूर्ण रूप से लागू हो और उनमें से किसी को भी निरुत्साहित न किया जाये। अंत में, सरकार ने कहा है कि ये नियम राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिये आवश्यक हैं और सभी एनजीओ को इनका पूर्ण पालन करना चाहिए।