जून के शुरुआती दिनों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक जबरदस्त धूलभरी आँधियों का प्रकोप देखा गया, जिसने गुरुग्राम, दिल्ली और नोएडा के कई हिस्सों को धधकते धूल के बादल में घेर लिया। सुबह के शुरुआती घंटों में तेज़ी से उठते धूल के झोंके सड़कें और किचन गैस को भी प्रदूषित कर रहे थे, जिससे कई लोगों को सांस लेने में कठिनाई हुई। स्थानीय जनता ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जहाँ धुंध की मोटी परत ने इमारतों की ऊँचाइयों को भी अस्पष्ट कर दिया था। इस आपदा के कारण कई स्कूल, ऑफिस और व्यवसायिक संस्थाओं को देर से खुलना पड़ा और सार्वजनिक परिवहन के संचालन में भी व्यवधान आया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने तुरंत स्थिति की निगरानी की और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कुछ भागों के लिए नारंगी चेतावनी जारी की। इस चेतावनी में धूलभरी आँधियों के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों और दृश्यता में गिरावट के बारे में बताया गया, साथ ही लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने, आँखों की सुरक्षा के लिए चश्मा उपयोग करने और बेघर रहनुमा नदियों या जलाशयों से दूर रहने की सलाह दी गई। विभाग ने यह भी बताया कि इन आँधियों के साथ कभी-कभी हल्की बौछारें भी संभव हैं, जिससे सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। धूलभरी आँधियों का मुख्य कारण उत्तर-पश्चिमी दिशा से लगातार बहती हुई गर्म हवाएँ और प्रमुख रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों में सूखे की स्थिति को माना गया है। इस मौसम में जब तापमान में अचानक गिरावट आती है, तो धूल के कण वायुमंडल में ऊँचाई तक उठते हैं और बड़ी तेज़ी से फैलते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार की धूलभरी आँधियों से जलीय स्रोतों में ओस की बूंदें भी बिखर सकती हैं, जिससे अस्थायी ठंडक का अहसास हो सकता है। कई क्षेत्रों में बाद में हल्की बरसात भी शुरू हुई, जिससे धूल कुछ हद तक घटाने में मदद मिली। आँधियों के प्रकोप के बाद स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं ने परेशानियों की बढ़ती संख्या को दर्ज किया, विशेषकर अस्थमा और श्वसन रोगियों में गंभीर लक्षण देखे गए। डॉक्टरों ने फेफड़ों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए दवाओं की आवश्यकता पर बल दिया और नागरिकों को घर के अंदर रहकर खिड़कियों को बंद रखने की सलाह दी। साथ ही, स्कूलों और कार्यालयों में वेंटिलेशन सिस्टम की सफाई तथा एयर कंडीशनर के फिल्टर बदलने की सिफारिश भी की गई। कुल मिलाकर इस धूलभरी आँधियों के प्रकोप ने एक बार फिर यह साबित किया कि जलवायु परिवर्तन और शहरी विकास के अनुकूलन में सतत तैयारी की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। आईएमडी ने भविष्य में ऐसे प्रकोपों को कम करने के लिए अधिक सटीक पूर्वानुमान और समय पर चेतावनी जारी करने का वचन दिया। नागरिकों को भी चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सजग रहें और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली जानकारी को गंभीरता से अपनाएँ।