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Breaking News: संजय राउत का उग्र हमला: शिंदे पर नई जंग, उभरे शिवसेना विद्रोही और पार्टी का बंटन
🕒 1 hour ago

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर एक बार उथल-पुथल मची है। शर्यामुखी शिवसेना के दोहरे चेहरे पर संजय राउत ने नई और तीखी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने शिंदे सरकार को "जाँच‑ट्यूब बेबी" कहकर सख़्त बंधन तोड़ दिया। यह बयान तब आया जब राज्य में "गॉंढ़" विवाद के बाद से ही पार्टी के अंदर फूट के संकेत दिख रहे थे और कई एमपी-अध्यक्ष अपने पद त्यागने की चर्चा कर रहे थे। राउत ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए शिंदे पर सवाल उठाए, यह कहकर कि उनका समर्थन भ्रष्टाचार और असंतोष के बीच फँसा है, और अंत में उन्होंने कुछ उभरे हुए विद्रोही सांसदों को "गर्भवती" और "छह सांसदों को जन्म देने वाली" कहा, जिससे हवा में नई तकरार का रंग भर गया। इस कड़े शब्दावली के पीछे राउत का मुख्य उद्देश्य शिंदे की सरकार को कमजोर करना और अपने सहयोगियों को एकजुट करना है। उन्होंने शिंदे की पार्टी को सीधे अमित शाह के हाथों का "टेस्ट‑ट्यूब बेबी" घोषित किया, जिससे यह बयान शिंझा की राष्ट्रीय राजनीति में भी उभरेगा। इसके साथ ही भाजपा के महाजन मंत्री और अपने ही सहयोगी के बीच झगड़े भी तेज़ हुए, जहाँ दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक चालों और गठबंधन के उद्देश्य का आरोप लगाया। राउत का यह बयान न केवल शिंदे पर बल्कि महाराष्ट्र की सभी प्रमुख दलों पर भी गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि इस तरह के बयानों से पार्टी के भीतर असंतोष और अस्मिता के बारे में सवाल उठते हैं। उभरे विद्रोही सांसदों को "बैरक" और "भ्रष्‍ट" कहकर राउत ने अपनी नाराज़गी को खुलकर व्यक्त किया, जबकि उन्होंने इन्हें "भ्रष्ट बेतोरे" भी कहा। इस बयान के बाद, कई विद्रोही सांसदों ने शिंदे के साथ अपना समर्थन बहाल करने या नई दिशा खोजने की बात भी बतायी। निलेश नारायण राणे, जो शिंगनावर में शासकीय पार्टियों के प्रमुख नेता हैं, ने राउत के इस आरोप को असत्य ठहराते हुए अपने आप को 'गटर-चाप' की सज़ा देने के रूप में स्वीकार किया, और आगे कहा कि पार्टी के भीतर इस तरह के बयानों से साल भर की निष्क्रियता समाप्त होगी। यह विवाद तब चरण पर पहुँचा जब कई राजनैतिक विश्लेषकों ने बताया कि शिवसेना का विभाजन महाराष्ट्र की राजनीति को "विखंडित" कर सकता है। राउत ने कहा कि विद्रोही सांसदों का "धोखेबाज़" होना राज्य को खंडित करेगा, और यह कदम "महाराष्ट्र को फाड़ने" जैसा है। इस बयान से राज्य के कई सांसद और विधानसभागी प्रभावित हुए, जहाँ कुछ ने अपने पद छोड़ने की बात कही और कुछ ने शिंदे सरकार के साथ पुनः गठबंधन करने के संकेत दिखाए। अंत में, यह कहा जा सकता है कि संजय राउत के कठोर और तीव्र बयानों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई देरी भर दी है। शिंदे सरकार और शिवसेना के भीतर चल रहा संघर्ष अब और गहरा हो सकता है और यह किस दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। भविष्य में यह देखना होगा कि विद्रोही सांसद अपने निराकरण के लिए कौन सा मार्ग चुनेंगे, और क्या शिंदे और राउत एक नई गठबंधन रणनीति के साथ इस गठबंधन को बचाने की कोशिश करेंगे, या फिर महाराष्ट्र की राजनीति एक और बड़े रूपांतरण की ओर अग्रसर होगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 22 Jun 2026