मुंबई में राजनीतिक माहौल हलचल से भर गया है। महाराष्ट्र की प्रमुख विपक्षी पार्टी शिवसेना (उभयचर) में हाल ही में उत्पन्न हुए ‘गाबरु’ विवाद के बाद, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने फिर से एक तीखा बयान दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विरोधी इशारा करते हुए, सच्चे कांग्रेसी नेता भरोसेमंद स्टीवर्ड, शिंदे को ‘अमित शाह की टेस्ट‑ट्यूब बॉयी’ कह कर टकराव की लकीर को और तीखा कर दिया। इस आपदा की पीठ पीछे छिपे राजनैतिक खेल से, कई राजनैतिक तख़्तों के सदस्य अब कूदने की तैयारी कर रहे हैं। राउत ने अपने नये बयान में कहा कि शिंदे का चयन भाग्य नहीं, बल्कि केन्द्र के उपराष्ट्रपति अमित शाह की पसंद है। उन्होंने शिंदे को ‘गर्भवती’ शब्द से जोड़ते हुए कहा, "वह गर्भवती है और छह सांसदों को जन्म दे रही है"—जिसका मतलब था कि शिंदे के तहत उभयचर शिवसेना के कई सांसद धीरे‑धीरे पार्टी से हटते जा रहे हैं। इस पर शिंदे के समर्थकों ने कड़ी कसौटी रखी और कहा कि यह बयान बुरा, अपमानजनक और अनिच्छित है। यही नहीं, राउत ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उभयचर शिवसेना के विद्रोही सांसद "देशद्रोही" हैं और वे महाराष्ट्र को बिचड़ने की कगार पर ले जा रहे हैं। उभयचर शिवसेना के कई नेता अब इस बंटवारे का फायदा उठाने के लिये तैयार हैं। वे संभ्रांतता और सत्ता के अवसरों को देखते हुए शिंदे से दूर जाने की सोच रहे हैं। इस बीच, राष्ट्रीय पार्टी भाजपा के एक उच्च अधिकारी ने शिंदे को ‘आधारशिला’ के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे इस कटी हुई सच्चाई में और जटिलता आई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस बगावत का असर न केवल महाराष्ट्र में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी पड़ेगा, क्योंकि इससे भाजपा और कांग्रेस दोनों के बीच नई गठजोड़ की संभावना बन रही है। वर्तमान में, राउत का यह आक्रामक बयान शिंदे के दुरुपयोग को उजागर करने का एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिंदे का उपयोग मुख्यमंत्री फडणवीस को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है और इससे शिवसेना का मूलभूत तंत्र टूटकर बिखर रहा है। अंत में, राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के बयानों से जनता के बीच असंतोष बढ़ सकता है, और महाराष्ट्र में आगे और अधिक उलटफेर की संभावना बनी हुई है।