पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री ने इस साल की बजट प्रस्तुति में एक महत्वपूर्ण वादा किया है— राज्य की सभी रिक्त सरकारी नौकरियों में 1 लाख नई नियुक्तियों को भरना और इनमें से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत पद आरक्षित करना। यह घोषणा राज्य के बेरोजगार युवाओं, विशेषकर महिलाओं, के लिए नई उम्मीदों का संदेश लेकर आई है। बजट की शुरुआत में वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ सालों में सरकारी रिक्तियों का पूल लगातार बढ़ता गया है, जिससे कुशल कार्यकर्ता आय के योग्य नहीं हो पा रहे थे। इस गठबंधन सरकार ने इस समस्या का समाधान करने के लिये एक स्पष्ट योजना बनायी है, जिसमें विभिन्न विभागों में मौजूदा खाली पदों को पहचान कर तत्क्षण भरपाई की जाएगी। बजट दस्तावेज़ में बताया गया है कि 1 लाख नौकरियों को भरने के लिये 12 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निधि आवंटित की जाएगी। इस राशि को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है— भर्ती योजना, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम, तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं का त्वरित सरलीकरण। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मतलब है कि करीब 33 हजार पद महिलाओं को विशेष रूप से मिलेंगे, जिससे उनके आर्थिक संरक्षण और सामाजिक मुक्ति को सशक्त बना सकें। इसके अलावा, महिला कर्मचारियों के लिये विशेष सुविधाओं, जैसे कि मातृत्व अवकाश में वृद्धि, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय और स्वास्थ्य बीमा कवरेज में सुधार की भी घोषणा की गई है। बजट में अन्य प्रमुख पहलों में बेरोजगार स्नातकों के लिये 3,000 रुपये की मासिक सहायता, महिला यात्रियों के लिये मुफ्त बस पास, तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में AIIMS की नई शाखा खोलने की योजना शामिल है। राज्य ने पाँच नए जिला बनाने की योजना भी प्रस्तुत की है, जिससे प्रशासनिक कार्य में दक्षता और विकास कार्य को तेज़ी मिल सके। इन सबके साथ, सैलरी स्ट्रक्चर में भी सुधार किया गया, जिससे कर्मचारियों की वास्तविक वेतन में 10 प्रतिशत तक वृद्धि की जाएगी। यह सब मिलाकर बजेट का कुल खर्च लगभग 36,000 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है, जिसमें सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। अंत में कहा जा सकता है कि यह बजट पश्चिम बंगाल की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को संवारने के लिये एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। 1 लाख नौकरियों की भरपाई और महिलाओं के लिये 33 प्रतिशत आरक्षण जैसी पहलें न सिर्फ बेरोजगारी को घटाएंगी, बल्कि समाज में लिंग समानता को भी प्रोत्साहित करेंगी। यदि सरकार इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करती है, तो प्रदेश के विकास के लिये एक नई ऊर्जा का संचार होगा और प्रदेश के नागरिकों को एक स्थिर और समृद्ध भविष्य की आशा मिलेगी।