जाने-माने विश्व आर्थिक मंच के प्रमुख देशों के नेताओं ने इटली में आयोजित जी‑७ शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन एआई सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर गहन चर्चा की। प्रमुख एजेंडा में अमेरिकी अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों तक "विश्वास योग्य भागीदार"ों को पहुँच प्रदान करने की प्रक्रिया का निर्धारण शामिल था। इस पहल का उद्देश्य एआई तकनीक के विकास को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत नियंत्रित करना और संभावित जोखिमों को कम करना था। कई स्रोतों ने बताया कि अमेरिका ने कुछ देशों और संस्थाओं को अपने नवीनतम एआई मॉडल, जैसे बड़े भाषा मॉडल, के परीक्षण और उपयोग के लिए विशेष अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की। यह कदम एआई के दुरुपयोग को रोकने और प्रतिस्पर्धी देशों के बीच तकनीकी अंतर को संतुलित करने के प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। शिखर सम्मेलनों में प्रमुख चर्चा का बिंदु यह था कि एआई के विकास में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता को कैसे सुनिश्चित किया जाए। संयुक्त राज्य के प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि एआई को एक वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के रूप में देखा जाना चाहिए, परन्तु इसके उपयोग में प्रतिबन्धित मानकों को लागू करना अनिवार्य है। इस संदर्भ में, जी‑७ के कई सदस्य देशों ने अपने राष्ट्रीय एआई नियामक ढाँचे को सुदृढ़ करने की योजना बताई, जिससे जोखिम भरी तकनीकों तक अनाधिकार पहुँच को रोका जा सके। साथ ही, यूरोपीय संघ और जापान ने अपने मौजूदा एआई नियमों को अद्यतन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित मानकों को स्थापित करने के लिए सहयोग का प्रस्ताव रखा। शिखर पर भारत के प्रतिनिधि ने भी एआई के अवसरों और चुनौतियों पर अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति और मानवता के समर्थन में रहता है और एआई के माध्यम से सामाजिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। इस दौरान यह उल्लेख भी किया गया कि भारतीय स्टार्ट‑अप और अनुसंधान संस्थान इस क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं, परन्तु उन्हें भी अंतरराष्ट्रीय मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक होगा। जी‑७ के कई सदस्य देशों ने भारत को "विश्वास योग्य भागीदार" के रूप में मान्यता दी और सहयोग के नए मार्ग स्थापित करने का संकेत दिया। शिखर सम्मेलन की समापन टिप्पणी में एआई सुरक्षा जोखिमों को घटाने के लिए एक संयुक्त यूएस‑नेतृत्व वाली गठबंधन बनाने की मांग की गई। इस गठबंधन में प्रमुख एआई कंपनियों, जैसे ओपनएआई, एंथ्रोपिक, गूगल आदि को भी शामिल करने की संभावना बनी है, ताकि तकनीकी विकास के साथ-साथ नैतिक नियंत्रण भी सुदृढ़ हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बहुपक्षीय पहल विश्व के एआई विनियमन की दिशा को नया रूप देगी और तकनीक के दुरुपयोग को रोकने में प्रभावी सिद्ध होगी। अंत में, सभी नेताओं ने एआई को सतत आर्थिक विकास के एक प्रमुख साधन के रूप में पहचाना, परन्तु इसके साथ ही जिम्मेदार उपयोग, डेटा सुरक्षा और मानव अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देने का वचन लिया।