पंजाब के मुख्यमंत्री और ए.ए.पी. नेता भगवंत मान ने हाल ही में अकाल तहत द्वारा जारी किए गए आदेश को खुलकर खारिज कर दिया। वह यह बात स्पष्ट कर रहे हैं कि वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति उनके बजाय किसी और का है और इस विवाद के पीछे राजनीतिक दलों की साजिश निहित है। यह बयान कई प्रमुख समाचार एजेंसियों के माध्यम से सामने आया, जहाँ मान ने इस मुद्दे को लेकर "मैं नहीं" शब्दों को दोहराया और यह आरोप लगाया कि उनकी खिलाफत करने वाले सियासी दिग्गज इस मामले को अपने फायदे के लिए प्रयोग कर रहे हैं। अकाल तहत, जो सिख धर्म के उच्चतम धार्मिक निकाय के रूप में माना जाता है, ने मान के खिलाफ "एंटी गुरु" का लेबल लगाते हुए उनकी आलोचना की। इस फैसले के बाद कई सिख यूनियन और राष्ट्रीय स्तर के राजनैतिक दलों ने मान के खिलाफ बहिष्की करने की घोषणा की, विशेषकर भारतीय जनता पक्ष ने इस मामले को लेकर सख़्त रुख अपनाया। मान का कहना है कि इस आरोप को झूठा प्रचार माना जाना चाहिए क्योंकि यह एक साक्ष्यहीन और बनावटी कहानी है, जिसमें उनका कोई लेना‑देना नहीं। भगवंत मान ने कहा कि इस विवाद की जड़ उनके विरोधियों की चालबाजियों में है, जो उन्हें गिराने के लिये इस तरह के झूठे वीडियो और धार्मिक आदेशों को हथियारा बना रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर यह भी कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य पंजाब में विकास और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाना है, न कि धार्मिक या राजनीतिक षड्यंत्र में फँसना। उन्हें यह भी बताना मिला कि कई पीड़ित लोग उनके खिलाफ लाए गए झूठे आरोपों को खारिज कर रहे हैं और उनके समर्थन में आवाज़ उठा रहे हैं। इस घटना का राजनीतिक दलों पर गहरा असर पड़ा है। कई विपक्षी पार्टियों ने मान के इस बयानों को देखा और कहा कि यह एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच की शक्ति लड़ाई को दर्शाता है, जहां धार्मिक संस्थाएँ भी राजनीति में इस्तेमाल की जा रही हैं। ए.ए.पी. के भीतर भी इस खींचातानी को लेकर गहरी चिंताएं जताई गईं, क्योंकि ऐसे आदेशों का विपक्षियों के साथ तालमेल बढ़ाने की संभावना है। अंत में, भगवंत मान ने दृढ़ संकल्प के साथ कहा कि वह इस झूठे आरोप को अपने खिलाफ नहीं चलाने देंगे और कानूनी कार्यवाही का सहारा लेंगे। वह यह भी आश्वस्त कर रहे हैं कि सिख समुदाय को एकजुट रखने और उनके धार्मिक अधिकारों को सुरक्षित रखने हेतु वे सभी प्रयास करेंगे, जबकि इस विवाद के पीछे छिपी सियासत को उजागर करने का वचन दिया है। इस पहल से यह साफ है कि मान का उद्देश्य केवल अपनी प्रतिमा बचाना नहीं, बल्कि पंजाब में शांति और विकास को बनाए रखने के लिये एक सशक्त मंच स्थापित करना भी है।