फ़्रांस के शहर बोर्डॉ में शुरू हुए जी‑7 शिखर सम्मेलन के प्रथम दिन में विश्व के प्रमुख नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी एशिया की जटिल स्थिति पर गहन चर्चा की। राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रोन ने मंचन किया और सभी सात देशों के प्रमुखों को एकजुट आवाज़ में कहा कि यूरोपीय सुरक्षा संरचना को दृढ़ बनाना अनिवार्य है। इस मंच पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वॉलेडिमिर ज़ेलेंस्की की उपस्थिति ने चर्चा का दिशा‑निर्देश स्पष्ट कर दिया, क्योंकि उन्होंने मार्जिनल राजनयिक क्षितिज पर एक सशक्त संदेश दिया: "हमारी स्वतंत्रता के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का समर्थन अपरिवर्तित रहना चाहिए।" ज़ेलेंस्की ने रुस के निरंतर आक्रमण के खिलाफ सैन्य और आर्थिक सहायता को बड़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही शांति वार्ता के मंच को पुनः सक्रिय करने की अपील की। शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के अस्थिर माहौल को भी प्राथमिकता दी गई। इरान के राष्ट्रपति ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद की संभावना पर चर्चा हुई, जबकि मध्यस्थता की संभावनाओं को जांचते हुए सब्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए सामूहिक उपायों पर सहमति व्यक्त की। इस संदर्भ में, जी‑7 देशों ने इरान के नाभिकीय कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय नीतियों पर विचार-विमर्श किया, और आर्थिक प्रतिबंधों के साथ कूटनीति के दोहरे पथ को अपनाने का प्रस्ताव रखा। कई देशों ने कहा कि स्थिरता के लिए ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक पुनर्निर्माण को भी साथ लेकर चलना होगा। अंत में, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी नीतियों की दिशा को स्पष्ट किया, जिसमें उन्होंने यूक्रेन को दी जा रही सहायता के पैमाने को बढ़ाने और रुस पर आर्थिक प्रतिबंधों को सख्त करने की बात कही। ट्रम्प के बयान को भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने ज़ेलेंस्की के साथ "बहुत अच्छी" मुलाकात के बाद रुस को शांति सौदा करने का आह्वान किया, परंतु जी‑7 ने इस विचार को दूरस्थ माना और कहा कि शर्तबद्ध शांति वार्ता तभी संभव है जब रुस अपने आक्रमण को तुरंत रोक दे। यह बहस दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर विभिन्न दृष्टिकोणों का संगम कैसे स्थापित होता है। शिखर सम्मेलन की समाप्ति के साथ, जी‑7 ने एक व्यापक घोषणा जारी की, जिसमें यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष निधि स्थापित करने, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और पश्चिमी एशिया में शांति संरचना को मजबूत करने के लिए सतत सहयोग का वचन शामिल है। ज़ेलेंस्की का भावनात्मक भाषण और यूरोपीय बड़े नेताओं की एकजुटता ने इस शिखर को वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के नए चरण की ओर ले जाने का संकेत दिया। अब देखना यह है कि यह राजनीतिक संकल्प वास्तविक कार्य में कैसे बदलता है और विश्व मंच पर शांति एवं समृद्धि के लिए कौन सी नई दिशा स्थापित होती है।