जैपुर में कल शाम को कोकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के स्थापितकर्ता अभिजीत डीपके पर एक प्रेडिक्टेबल नहीं, बल्कि रौद्र घटना घटी। स्थानीय जनता के एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान, जब अभिजीत जी मंच पर अपने विचार रख रहे थे, तो अचानक एक समूह के सदस्य ने उन्हें कई बार थप्पड़ मारा, जिससे उनका चेहरा खून खून हो गया। इस बेधड़क हमले को तुरंत सोशल मीडिया पर ट्रांस्मिट किया गया और इंटरनेट पर वायरल हो गया, जिससे पूरे देश में गहरी चिंता और गुस्सा उत्पन्न हुआ। अभिजीत जी की इस स्थिति को संभालते समय उनका स्वर दृढ़ बना रहा, परन्तु शारीरिक दर्द स्पष्ट था, और उन्होंने बाद में बताया कि इस हमले से उन्हें शारीरिक चोट के अलावा मनोवैज्ञानिक आघात भी हुआ। इस घटना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने तीव्र प्रतिक्रिया दी। कम्युनिस्ट पार्टी (एमार्क्सवादी) ने अपने आधिकारिक बैनर पर इस हमले की निंदा की और कहा कि वैध विरोध के लिए हिंसे का सहारा लेना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। कांग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों ने भी स्पष्ट रूप से कहा कि अभिजीत डीपके पर इस प्रकार की शारीरिक हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और कहा कि अपराधी व्यक्तियों को सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कई नागरिक अधिकार संगठनों ने भी इस मामले में न्याय की मांग की और पुलिस पर दबाव डाला है कि वे तुरंत त्वरित जांच शुरू करें और दोषियों को कड़ी सजा दिलवाएँ। जैपुर पुलिस ने घटना स्थल पर कई कैमरे और गवाहों के बयान एकत्र कर प्रारम्भिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है और सभी संभावित आरोपियों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई कर रही है। अभिजीत जी के समर्थन दल ने पुलिस को आग्रह किया कि वे बिना किसी देरी के कट्टरपंथी तत्वों को पकड़ कर कानूनी कार्रवाई करें, क्योंकि ऐसी हिंसा नागरिक सुरक्षा को नुकसान पहुँचाती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हिला कर रख देती है। इस घटना ने सार्वजनिक संवाद में एक नया प्रश्न उठाया है: क्या आज की राजनीतिक लहर में असहिष्णुता और अनुशासनहीनता ने हमारी सार्वजनिक चर्चा को धूमिल कर दिया है? कई विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के तेज़ प्रसार के कारण इस प्रकार की हिंसक घटनाएं जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर उठती हैं, जिससे सरकार और समाज दोनों को सावधानीपूर्वक कदम उठाने की आवश्यकता है। अभिजीत डीपके की जल्दी से स्वस्थ होने की कामना करते हुए, सभी वर्गों से इस घटना पर सामूहिक विचार-विमर्श और सतर्कता की अपील की गई है। अंत में, अभिजीत डीपके के इस प्रतिकूल अनुभव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतांत्रिक आंदोलन में शांति, संवाद और सम्मन को प्राथमिकता देना आवश्यक है। राष्ट्र के विभिन्न कोने से आए आलोचनाओं और समर्थन के बीच, यह स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही इस हमले के जिम्मेदारों को सजा दिलवाना ही इस घटना का वास्तविक समाधान होगा। समाज को सिखना चाहिए कि असहिष्णुता के प्रति शून्य सहनशीलता रखी जाए, और हर नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार सुरक्षित रखने के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।