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Breaking News: असम के जोरहाट में आईएएफ AN-32 विमान क्रैश: मौतां की गिनती और कारणों की खोज
🕒 2 hours ago

जोरहाट, असम (१२ जून) – भारतीय वायुसेना के AN-32 परिवहन विमान का एक उड़ान स्थल पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होना पूरे भारत में गहरी चिंता का कारण बन गया है। दुर्घटना की सूचना सुबह ९:३० बजे ज किन्ही स्थानिक स्रोतों से प्राप्त हुई, जब विमान को जौरहाट एयरफोर्स बेस पर उतरने के लिए निर्देशित किया गया था। लैंडिंग के दौरान अचानक तकनीकी खराबी के कारण विमान का डगमगाना शुरू हुआ और अंततः रनवे के किनारे गिर गया। इस दुर्घटना में नौजनित सैनिक और चालक दल के सदस्य घायल हुए, जबकि दो पायलटों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। दुर्बीट की विस्तृत जांच अभी चालू है, पर प्रारम्भिक रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ कि क्षतिग्रस्त एरोडायनामिक नियंत्रण प्रणाली और संभावित हाइड्रॉलिक फेल्योर इस दुर्घटना के प्रमुख कारण हो सकते हैं। घटना स्थल पर तीव्र बरसात के साथ तेज़ हवाओं की भी रिपोर्टें मिली हैं, जिससे लैंडिंग के दौरान अतिरिक्त कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती थीं। भारतीय वायुसेना ने तुरंत दुर्घटना स्थल से सभी बचे हुए कर्मियों को बचा लिया और चिकित्सीय सहायता प्रदान करने के लिए एम्ब्युलेंस और एयर सपोर्ट भेजा। इस दुर्घटना ने सेना के भीतर एयरोस्पेस उपकरणों के नियमित रखरखाव और आधुनिकीकरण की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। कई विशेषज्ञों ने कहा कि AN-32 जैसे पुराने मॉडल के विमानों पर नियमित निरीक्षण और उन्नत तकनीकी अद्यतन न होने से ऐसी दुर्घटनाएँ बढ़ सकती हैं। साथ ही, मौसम संबंधित जानकारी के सटीक विश्लेषण और पायलटों को त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने की भी आवश्यकता पर बल दिया गया। दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों को देखते हुए, भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन आयोग को इस घटना की पूर्ण जांच करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, मानव तुच्छता को रोकने के लिए आवश्यक सभी त्वरित उपाय लागू किए जाएंगे। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को दोहराने से बचने के लिए वायुसेना के विमानों की बुनियादी ढाँचे को बड़ाबड़ाने के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया जाएगा। निष्कर्षतः, जोरहाट में AN-32 विमान के क्रैश ने न केवल कई जीवों की कुर्बानी दी है, बल्कि भारतीय वायुसेना की सुरक्षा और रखरखाव प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर किया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी उन्नयन, मौसम संबंधी सटीक पूर्वानुमान और कर्मियों की सक्रिय प्रशिक्षण प्रणाली को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इस दुर्घटना से सीख लेकर, देश की वायु सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के कदम उठाने का समय अब आया है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 13 Jun 2026