📰 Kotputli News
Breaking News: नासिक में टीसीएस केस: महिला ने पाकिस्तानी धर्मोपदेशी के वीडियो दिखाकर जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप
🕒 1 week ago

नासिक जिले में भारतीय टेलेकोम कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के कर्मचारियों द्वारा उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़ी जांच ने फिर एक नई जमीन पर कदम रखा है। एक महिला शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे अपने साथी के साथ रहने की शर्त के रूप में पाकिस्तानी प्रेक्षक के धार्मिक वीडियो दिखाए गए, जिनमें 'भगवान के गीत निषेध' और मंदिर न जाने की चेतावनी दी गई थी। यह बयान नासिक पुलिस की केस फ़ाइल में दर्ज किया गया है, जो इस मामले को सामाजिक और धार्मिक उथल-पुथल के बीच खड़ा कर रहा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि जब वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में काम करती थी, तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे अपने परिवार में रहने की शर्त के रूप में इस प्रकार के वीडियो दिखाए। वीडियो में एक पाकिस्तानी इस्लामी प्रवक्ता ने हिंदू धार्मिक संगीत और मंदिर जाने को नकारते हुए, इस्लाम के मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया। इस तरह के बयानों को सुनते ही महिला ने महसूस किया कि उसे धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित किया जा रहा है, और उसकी नौकरी की सुरक्षा भी खतरे में है। वह कहती है कि इस दबाव के चलते उसे अपने निजी जीवन में भी बदलाव करने के लिए मजबूर किया गया। विगत दिनों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के खिलाफ दर्ज कई यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के मामलों ने इस कंपनी की छवि को धूमिल किया है। इस केस में भी कई व्यक्तियों के नाम चार्जशीट में शामिल किए गए हैं, जिनमें एक पूर्व संसद सदस्य इम्तियाज़ जालिल का भी उल्लेख है। पुलिस ने इस मामले में सभी संबंधित व्यक्तियों की गवाहियों को दर्ज किया है और आरोपों की सच्चाई स्थापित करने के लिए विस्तृत जांच का आदेश दिया है। विशेष जांच टीम ने यह भी कहा कि यदि यह प्रमाणित हो गया तो कंपनी के ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी सजा लागू की जा सकती है। समाप्ति की ओर देखते हुए इस घटना ने भारतीय कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता को उजागर किया है। इस प्रकार के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाना और पीड़ितों को न्याय दिलाना अत्यावश्यक है। साथ ही, कंपनियों को ऐसे झंझट से बचने के लिए आंतरिक नीतियों को सुदृढ़ करना चाहिए, जिससे सभी कर्मचारियों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार प्राप्त हों। यह केस न केवल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए, बल्कि पूरे उद्योग के लिए एक चेतावनी बनकर उभरा है कि धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 05 Jun 2026