रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव डालने का कोई फायदा नहीं है। पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि भारत‑अमेरिका के संबंधों का भारत‑रूस रणनीतिक साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वह भारत को "विश्वसनीय साथी" कहते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक सहयोग की भी सराहना की और रूस की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक टिप्पणी की। इस बयान में उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा भारत के विदेशनीति को नियंत्रित करने की कोशिशों को "हानिकारक" बताया और कहा कि ऐसी कोशिशें अंततः विफल होंगी। पुतिन के इस बयान का मूल कारण भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। न्यूडेल में कई नवीनतम मिसाइल प्रणालियों और एटॉमिक ऊर्जा के क्षेत्र में समझौते हुए दोनों देशों ने अपने रणनीतिक हितों को सुदृढ़ किया है। पुतिन ने कहा कि भारत ने रूस से कई आधुनिक हथियार खरीदे हैं और इस सहयोग ने रूस को आर्थिक मंदी से बाहर निकलने में मदद की है। साथ ही, भारत-रूस व्यापार में पिछले दो वर्षों में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ मिला है। दूसरी ओर, पुतिन ने अमेरिकी दबाव की अक्षमता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव डालना बेकार है, क्योंकि भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र है और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार कदम रखता है।" उन्होंने भारत‑अमेरिका के समीपता को "शैक्षिक और व्यापारिक क्षेत्रों में बेहतर सहयोग" बताया, लेकिन यह कहा कि यह भारत के रूस के साथ गठबंधन को नहीं बदल सकता। पुतिन ने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों की रूख-रूढ़ीवाद और द्विपक्षीय शर्तें "भारी बोझ" बनकर सामने आती हैं, जिससे नई दिल्ली को अपने मूलभूत हितों के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। पुतिन ने भारत के आर्थिक विकास की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत की तीव्र गति से बढ़ती जीडीपी और निवेश आकर्षण ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। इस विकास को देखते हुए रूस चाहता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा-सहयोग, विशेषकर प्राकृतिक गैस और तेल के निर्यात‑आयात को और गहरा किया जाए। पुतिन ने कहा कि भारत के साथ इस सहयोग से न केवल रूस की निर्यात आय में वृद्धि होगी, बल्कि नई तकनीकों का आदान‑प्रदान भी संभव होगा, जिससे दोनों देशों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होगी। निष्कर्षतः, पुतिन का यह बयान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत‑रूस रिश्ते को बाहरी दबावों से बचाते हुए और आर्थिक तथा रक्षा सहयोग को बढ़ावा देते हुए दोनो देशों के लिए रणनीतिक लाभप्रद रहेगा। अमेरिकी दबाव चाहे कितना भी तीव्र हो, नई दिल्ली अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र रहेगा और रूस के साथ मिलकर अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाएगी। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की रणनीतिक संतुलन नीति को और अधिक सुदृढ़ करेगी और भविष्य में भारत‑रूस सहयोग के नए चरण की नींव रखेगी।