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Breaking News: तीरंदाजी की दहलीज: ईरान ने कुवैत‑बहरीन पर मिसाइल, अमेरिका ने केशम में आत्मरक्षा के कठोर प्रहार
🕒 13 hours ago

तीन दिन से बढ़ते तनाव के बीच मध्य पूर्व की जलधाराओं में धुएं की धुंध फिर से लग गई है। ईरान ने कुवैत और बहरीन दोनों पर बड़े पैमाने पर रॉकेट फायर किए, जबकि अमेरिकी सेनाओं ने खाड़ी में स्थित ईरान के क्वेश्म द्वीप पर "आत्मरक्षा" के तहत कई हवाई तथा समुद्री प्रहार किए। इस क्रम में टकराव की सीमा भूमि से बाहर समुद्र और आकाश तक फैल गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भय और चिंता पाई जा रही है। ईरान के राजधानी तहरीन ने आधिकारिक बयान जारी करके कहा कि उन्होंने कुवैत और बहरीन को लक्षित करके एक श्रृंखला में मिसाइलें दाग़ी हैं, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नौसैनिक बेसों को नष्ट करना और खाड़ी में अमेरिकी उपस्थिति को दमन करना है। दोनों छोटे-छोटे राष्ट्रों ने तुरंत आपातकालीन स्थितियों की घोषणा की, नागरिकों को शरण लेने और समुद्री सीमा के बाहर सतर्क रहने का निर्देश दिया। अमेरिकी रक्षा विभाग ने तुरंत जवाब दिया, यह कहते हुए कि उन्होंने कुवैत तथा बहरीन के ऊपर उड़ते हुए दुश्मन के मिसाइलों को रडार द्वारा पकड़ा और उनका काउंटर‑मिसाइल के माध्यम से निस्त्रिय किया। समान्य समय में, अमेरिकी नौसैनिक और वायु सेना के दलों ने क्वेश्म द्वीप के पास स्थित ईरानी शब्दुंडरी कमांड सेंटर्स पर कई सटीक प्रहार किए। अमेरिकी प्रवक्ताओं ने कहा कि ये प्रहार "आत्मरक्षा" के रूप में किए गए थे क्योंकि ईरान की क्षुद्रग्रह और ड्रोन इकाइयाँ अमेरिकी जहाजों की ओर बढ़ रही थीं। इस दौरान एक ईरानी तेल टैंकर, जो क्वेश्म द्वीप के निकट एक शिपिंग मार्ग से गुजर रहा था, को भी अमेरिकी मिसाइल ने निशाना बनाया, जिससे समुद्री परिवहन पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल युद्धसम्बंधी सुविधाओं को नष्ट करना है, नागरिक जहाजों को नहीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तीव्र टकराव ने कई प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान की मांग की, जबकि कई यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से युद्धविराम की अपील की। चीन और रूस ने दोनों पक्षों को संवाद के रास्ते अपनाने की चेतावनी दी, यह कहते हुए कि इस तरह की सैन्य लड़ाई विश्व तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। इस बीच, मध्य पूर्व में स्थित कई देशों की जलसेनाएँ सतर्क रहकर अपने समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार हैं। अंततः, खाड़ी में फिर से जागरूकता और सशस्त्र तत्परता की हवा बह रही है। जबकि ईरान ने अपने युद्धविरोधी विचारों को सुदृढ़ किया है, अमेरिका ने अपनी समुद्री शक्ति प्रदर्शित करते हुए कहा कि वह अपने मित्र राष्ट्रों की रक्षा में दृढ़ रहेंगे। इस संघर्ष का भविष्य अभी भी अनिश्चित है, परन्तु अंतरराष्ट्रीय समुदाय के निरंतर कूटनीतिक प्रयास ही इस क्षेत्र को फिर से शांति की ओर ले जाने की सबसे बड़ी आशा बन कर उभरे हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 03 Jun 2026