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Breaking News: भारत ने पाकिस्तान‑EU के जम्मू‑कश्मीर संकेत को ‘अनावश्यक’ करारते हुए कड़ा इमरानी बयान दिया
🕒 1 day ago

भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर गहरी असंतोष व्यक्त किया, जिसमें जम्मू और कश्मीर को "अंतरराष्ट्रीय मुद्दा" कहा गया। नई दिल्ली में इस पर जारी किए गए बयान में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह टिप्पणी "संपूर्ण रूप से अनुचित" है और भारत की संप्रभुता पर अड़चन डालती है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम इस तरह के अनावश्यक और असंतोषजनक रुझानों को श्रेणीबद्ध रूप में नकारते हैं," और यह आग्रह किया कि विदेशियों को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान‑EU के बयान के जारी किए जाने के एक दिन बाद आई, जिसमें दोनों पक्षों ने कहा कि कश्मीर का "शांतिपूर्ण समाधान" अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा की जानी चाहिए। बयान के बाद, प्रधानमंत्री के कार्यालय ने भी स्थिति को लेकर स्पष्टता दी। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न भाग है और कोई भी विदेशी टिप्पणी भारत की वैधता को चुनौती नहीं दे सकती। इस पर भारतीय अभियांत्रिकी और विदेश नीति विशेषज्ञों ने कहा कि यह रुख भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति के अनुरूप है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए हर संभव उपाय अपनाया जा रहा है। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने बाद में कहा कि उनका बयान किसी विशेष तंत्र का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक सामान्य विचारधारा पर आधारित था, फिर भी उन्होंने भारत की टिप्पणियों को सुनने की इच्छा व्यक्त की। पाकिस्तान की ओर से स्थित बयान में कश्मीर को "न्यायसंगत" कहा गया और कहा गया कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाया जाना चाहिए। यह बयान पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया था। भारत ने इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से केवल तनाव बढ़ता है और इसका कोई सकारात्मक पहलू नहीं दिखता। इसके साथ ही, भारत ने कहा कि देश के आंतरिक मुद्दों में बिन बुलाए हस्तक्षेप केवल विवाद को बढ़ाएगा और शांति प्रक्रिया को बाधित करेगा। इस बीच, चीन और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को फिर से उठाने का कारण भी चर्चा का विषय बना। दोनों देशों ने हाल ही में विभिन्न मंचों पर कश्मीर को लेकर अपने-अपने विचार रखे, जिससे क्षेत्रीय स्थितियों में जटिलता बढ़ी है। भारत ने इन सभी टिप्पणीकारों को सावधान किया और कहा कि किसी भी प्रकार की बाहरी टिप्पणी भारत की आंतरिक स्थिरता को खतरे में नहीं डाल सकती। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, भारत ने शांति, समरसता और विकास के संदेश को दोहराते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्व देता है, परंतु यह सहयोग भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होना चाहिए। निष्कर्षतः, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर के प्रश्न को कोई भी विदेशी शक्ति अथवा मंच पर उठाना उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना जाएगा। विदेश मंत्रालय और मुख्यालय दोनों ने मिलकर इस बात पर ज़ोर दिया कि कश्मीर भारत की संपूर्ण संप्रभुता का अभिन्न हिस्सा है और इस पर कोई भी अंतरराष्ट्रीय दबाव अस्वीकार किया जाएगा। इस प्रकार, भारत की कूटनीति ने इस संकट को संभालते हुए दृढ़ता और शालीनता के साथ अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया, जिससे बाहरी ताकतों को संकेत मिला कि भविष्य में ऐसे बयानों से बचना ही बेहतर होगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 02 Jun 2026