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Breaking News: सीबीएसई ओएसएम विवाद: चेयरमैन‑सेक्रेटरी को स्थानांतरण, खरीद जांच समिति का गठन
🕒 1 day ago

सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) के ओन‑स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल को लेकर बढ़ती असंतोष के बीच, बोर्ड के चेयरमैन और सेक्रेटरी को अचानक स्थानांतरित कर दिया गया है। यह कदम केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आदेश पर उठाया गया, जिसका मकसद विवादित सेवा के खरीद प्रक्रिया की पूरी जांच करवाना है। ओएसएम पोर्टल का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से परीक्षा में अंक प्रदान करना था, परन्तु इस प्रणाली में कई तकनीकी glitches, डेटा लीक, और अनियमितताओं की खबरें सामने आईं, जिससे विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच गहरी चिंता उत्पन्न हुई। इन घटनाओं के प्रकाश में, प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक विशेष जांच समिति का गठन करने का निर्देश दिया। इस समिति में वित्तीय जांच विशेषज्ञ, आईटी सुरक्षा विशेषज्ञ, और शिक्षा नीति के अनुभवी सदस्य शामिल होंगे, जो ओएसएम सेवा के निविदा प्रक्रिया, तकनीकी मानकों और अनुबंध की शर्तों की विस्तार से जांच करेंगे। समिति का मुख्य लक्ष्य यह स्थापित करना है कि क्या नियुक्ति में किसी प्रकार का पक्षपात या बैंकरप्ट प्रक्रिया हुई है, और साथ ही भविष्य में ऐसी डिजिटल सेवाओं के लिए पारदर्शी और सुरक्षित ढांचा तैयार करना। विरोधी पार्टी कांग्रेस ने इस कदम को केंद्र सरकार की अकार्यकुशलता और द्रव्यमान भ्रष्टाचार का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि ओएसएम पोर्टल की गड़बड़ी को छुपाने के लिए ही उच्चाधिकारियों को पद से हटाया जा रहा है, जबकि असली जिम्मेदारियों को नहीं उठाया जा रहा। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, और कहा कि उन्हें इस विवाद में पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वहीं अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती माना है। स्मार्टफोन युग में डिजिटल परीक्षा प्रणाली का संचालन भले ही सुगमता लाए, परन्तु उसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा को सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इस संदर्भ में, विशेषज्ञों ने कहा कि पूरी प्रणाली को पुनः निरीक्षण करवाना चाहिए, जिसमें डेटा एन्क्रिप्शन, सर्वर की स्थिरता, तथा प्रयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स को निजी कंपनियों के साथ साझेदारी करने से पहले कड़ी बिडिंग प्रक्रिया और सार्वजनिक राय का सम्मान करना आवश्यक होगा। अंत में, यह स्पष्ट है कि ओएसएम विवाद ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की जटिलताओं को उजागर किया है। जांच समिति की कार्यवाही और वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण का परिणाम यह तय करेगा कि क्या सीबीएसई इस संकट से उबर पाएगा, और क्या भविष्य में छात्र-छात्राओं के लिए भरोसेमंद एवं पारदर्शी डिजिटल समाधान उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इस बीच, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को अस्थायी व्यवधान से बचने के लिए वैकल्पिक उपायों पर भरोसा करना पड़ेगा, जबकि सरकार से त्वरित और सटीप्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 02 Jun 2026