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Breaking News: केन्द्रीय सरकार ने सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव को हटाया: ओएसएम स्कैंडल की सच्चाई उजागर करने के लिए पैनल का गठन
🕒 1 day ago

केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में सीबीएसई (केंद्रीय बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) के अध्यक्ष और सचिव दोनों को पद से स्थानांतरित कर दिया, जिससे पूरे शैक्षिक जगत में हलचल मच गई। यह कदम उस विवादास्पद ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की कठोर जांच के बाद उठाया गया, जिसमें छात्रों के मूल्यांकन में भ्रामक प्रक्रियाओं और अनुचित अनुबंधों का आरोप लगा था। सरकार ने तत्काल एक उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ओएसएम सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, वित्तीय लेनदेन और संभावित भ्रष्टाचार की जाँच करना है। ओएसएम प्रणाली को लागू करने के लिए केंद्रीय बोर्ड ने कई निजी कंपनियों से अनुबंध करवाए थे, परंतु जल्द ही कई शिक्षकों, अभिभावकों और छात्र अभिप्राय समूहों ने बताया कि इस प्रणाली से परीक्षा के परिणामों में असमानता, तकनीकी गड़बड़ी और डेटा सुरक्षा की चिंताएँ उत्पन्न हुई थीं। इन शिकायतों के मद्देनज़र, संसद के एक सदस्य ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की महंगी तकनीकी सेवा को बिना पर्याप्त पारदर्शिता के अपनाना अनैतिक है। इस पर सरकार ने त्वरित कार्यवाही का वादा किया और सीबीएसई के शीर्ष प्रबंधन को हटाकर नई प्रशासनिक टीम का चयन किया। नए पैनल में वित्तीय विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ और विधिसम्मत जांचकर्ता शामिल होंगे, जो ओएसएम के निविदा दस्तावेज़, मूल्यांकन मानदंड, अनुबंध की शर्तें और भुगतान रिकार्ड की बारीकी से पड़ताल करेंगे। पैनल के सदस्य आश्वस्त हैं कि यदि किसी भी प्रकार की अनुचित लाभप्राप्ति या प्रक्रिया में कमी पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने बताया कि इस जांच के परिणामस्वरूप भविष्य में ऐसी तकनीकी सेवाओं को अपनाते समय अधिक कड़ाई से मानदंड स्थापित किए जाएंगे और सभी प्रक्रियाओं को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। विपक्षी दलों ने भी इस कदम की सराहना की, परन्तु उन्होंने दोहराते हुए कहा कि इससे केवल शीर्ष पदों का बदलाव नहीं, बल्कि पूरे शैक्षणिक प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। कई शिक्षाविदों ने कहा कि छात्रों के लिए निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली का होना अनिवार्य है और ऐसी स्कैंडल को दोबारा नहीं दोहराने के लिए शैक्षणिक नीतियों में स्थायी सुधार आवश्यक है। अंत में, इस कदम को एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि चाहे कितनी भी बड़ी संस्था हो, यदि प्रक्रिया में कोई त्रुटि या बेईमानी पाई जाती है, तो सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर कार्रवाई करेगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 02 Jun 2026