कॉलकत्ता के राजनैतिक माहौल में फिर से उथल-पुथल मची है। तमिलनाडु की महिला नेता, जिला की मौजूदा मुख्यमंत्री और ट्राइना मू्ल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने आज सुबह अपने घर के बाहर एक विशाल धरनी लगाई। इस धरनी का मुख्य कारण "पोस्ट-ऑल हिंसा" और "केंद्रीय सरकार द्वारा उठाए गए कुछ निर्णयों" को लेकर तीखा विरोध था। उनका संदेश स्पष्ट था – "हमें बड़े निर्णयों के लिए धक्का मत दो, नहीं तो राजनीतिक तनाव बढ़ेगा"। इस घोषणा के बाद सैकड़ों समर्थकों ने उनके साथ धरनी में हिस्सा लिया और सड़कों पर 'बाजियों को न रोको' के नारे गूंजे। हरियाणा की सीमा के पास स्थित नदी किनारे, ममता ने अपने भाषण में कहा कि यदि उनके प्रांत के लोगों की आवाज़ दबाई गई तो वह हर कीमत पर दमन का जवाब देंगे। उन्होंने भाजपा को संकेत दिया कि वे अपने समर्थकों को "मोटा कदम उठाने" की आवश्यकता नहीं देंगे, बल्कि शांति और संवाद के मार्ग पर आगे बढ़ने को कहा। इस दौरान, कई स्थानीय विधायक, सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी धरनी में उपस्थित रहे, परन्तु टीएमसी के भीतर टकराव भी उभरे। कुछ वरिष्ठ नेताओ ने सुबूत दिया कि पार्टी में कई छोटे-छोटे गठजोड़ और अराजकता है, जबकि ममता ने यह भी कहा कि "हमारा दल असली टीएमसी है, ५० विधायक हमारे साथ हैं"। भाजपा की ओर से भी तीव्र प्रतिक्रिया मिली। वे तुरंत अपने प्रदेशीय प्रमुखों को आदेश दे रहे हैं कि सभी टकरावों को रोकें और "ट्रायना मू्लीकरण" को नहीं होने दें। इसके तहत उन्होंने पार्टी के नेताओं को यह निर्देश दिया कि वे ममता बनर्जी की धरनी में किसी भी तरह की बाधा नहीं डालें और विरोध को शांतिपूर्ण बनाने का प्रयास करें। इस बीच, राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी की और कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद पर आवाज़ उठाना आवश्यक है, परन्तु हिंसा की कोई भी संभावना अस्वीकार्य है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस धरनी का समय-सीमा अभी तय नहीं हुई है और ममता ने कहा कि "जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती, हम इस धरनी को नहीं छोड़ेंगे"। उन्होंने अंत में यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो वे बड़े निर्णयों को ले सकते हैं, परन्तु वह इस बात को लेकर नहीं करेंगे कि उनके मतदाताओं की जरूरत को नजरअंदाज किया जाए। इस तरह का दृढ़ संकल्प और स्पष्ट संदेश दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है और आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है।