नई दिल्ली में हाल के दिनों में भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को फिर से सुदृढ़ करने का स्पष्ट संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार और नेपाल के प्रमुख नेताओं को एक साथ स्वागत किया, जिससे दक्षिण एशिया में शांति, व्यापार और सुरक्षा के नए अध्याय की शुरुआत हुई। इस दोहरे दौरे में मोदी ने दोनों देशों के साथ पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में वार्ता की और कई ठोस समझौते भी किए। इस कदम से भारत द्वारा अपने पड़ोसियों के साथ पूर्ण सहयोगी नीति को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कार्रवाई का प्रतीक है। दिल्ली में म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख के साथ मुलाकात में कई संवेदनशील मुद्दे उठाए गए। प्रधानमंत्री ने अँज गीरी सुई क्यी की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लोकतंत्र व मानवाधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, भारत ने म्यांमार के साथ व्यापार, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के कई प्रोजेक्ट्स पर चर्चा की। दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने और स्मगलिंग व असमंदित ट्रैफ़िक को रोकने के लिए विशेष योजनाओं पर सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरान, चीन के प्रभाव को संतुलित करने और भारत के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए भी संयुक्त रूप से रणनीति बनायी गई। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा के साथ हुई बैठक में दोनों देशों ने ऊर्जा, जल संसाधन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने का वादा किया। भारत ने नेपाल के लिए जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने और परस्पर लाभदायक व्यापारिक समझौते करने की पेशकश की। दोनों पक्षों ने सीमापार आवागमन को सुगम बनाने के लिए कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उपायों पर भी चर्चा की। इस प्रकार, भारत-नेपाल संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संयुक्त लक्ष्य दोनों देशों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। इन सभी बैठकों के दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि वह म्यांमार के सैन्य शासन को पूरी तरह अलग-थलग नहीं कर रहा है, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को जारी रखेगा, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। यह नीति बहुपक्षीय सहयोग की इच्छा को दर्शाती है और पड़ोसी देशों के बीच विश्वास की नई फिर से स्थापित करने की दिशा में एक प्रमुख कदम है। इन्सेफ़ और शांति की दिशा में इस पुनः जुड़ाव की प्रक्रिया से न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि दक्षिण एशिया की समग्र सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी। निष्कर्षतः, भारत द्वारा म्यांमार और नेपाल के साथ एक साथ उच्च स्तर की बातचीत करके अपने पड़ोसी देशों के साथ पुन:जुड़ाव की रणनीति तैयार की गई है। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक परस्परता और सुरक्षा सहयोग के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। आगे भी भारत की यह सक्रिय नीति दक्षिण एशिया में शांति, विकास और बंधुत्व को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।