वर्षा की इच्छा पुकारते भारत के पश्चिमी तट पर स्थित केरल राज्य को इस वर्ष दो बार दोहराए गए मानसून की देरी ने परेशान कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम मॉडल के अनुसार, केरल में दक्षिण‑पश्चिमी मानसून का आगमन अब पहले के अनुमान से कई दिनों से लेकर एक हफ्ते तक और भी देर से होगा। इस बदलाव का मुख्य कारण समुद्र से उठती गर्मी, एडजस्टेड ओशनिक लूटिंग और एथेनॉल‑मुक्त दृश्यता मिलाकर विकसित किए गये मॉडल में दिखाए गए वायुमंडलीय परिवर्तन हैं। पहली बार 30 मई को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया था कि केरल में बारिश 2 जून से शुरू होगी, परन्तु लगातार उच्च तापमान, कमजोर सुदूर पवन और विस्तारित उपोष्णकटिबंधीय उच्च दबाव के कारण यही अनुमान अब गलत साबित हो गया। IMD के मॉडल ने आज नई संभावना पेश की है: केरल में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना 6 से 9 जून के बीच रह सकती है, जबकि प्रमुख वर्षा 10 से 13 जून के बीच तेज़ी से बढ़ेगी। इस बीच, केरल के उत्तरी भाग में कुछ क्षेत्रों में बारिश की मात्रा पहले अपेक्षा से 20‑30 प्रतिशत अधिक हो सकती है, लेकिन दक्षिणी भाग में अभी भी कमी का खतरा बना रहेगा। इसी के साथ, इस देरी से न केवल कृषि को झटका लगा है, बल्कि जल आपूर्ति, जलविद्युत उत्पादन और पर्यटन उद्योग पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। केरल के किसानों ने पहले से ही बाढ़‑ग्रस्त धानों की फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त सिंचाई उपायों की योजना बनाई है, जबकि स्थानीय प्रशासन को जलाशयों के जल स्तर को नियंत्रित करने हेतु आपातकालीन कदम उठाने पड़ेंगे। इसके अलावा, केरल के समुद्र तटों पर पर्यटन के लिये भी यह देरी एक बड़ा जोखिम बन गई है, क्योंकि कई पर्यटक जलवायु के अनुकूलता के कारण अपने यात्रा कार्यक्रम को बदल रहे हैं। समापन में कहा जा सकता है कि जबकि आधिकारिक तौर पर मानसून का औपचारिक आगमन अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन वैज्ञानिक मॉडल स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि थोड़ी देर में ही केरल में बारिश की बौछारें शुरू होंगी। इस परिवर्तनशील मौसम को देखते हुए, राज्य सरकार को त्वरित राहत उपाय, जल संसाधन प्रबंधन और किसानों के लिये बीमा तथा समर्थन योजनाओं को सुदृढ़ करना आवश्यक है। अंततः, यदि मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी सही सिद्ध होती है, तो केरल के वसंत-उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में देर से गिरती बरसात ही इस वर्ष के कृषि‑उत्पादन को संतुलित कर सकती है।