सरकार ने हाल ही में अपनी "इमिग्रेशन और फ़ोरेनर्स रूल्स, 2025" में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की, जिससे भारत में विदेशी यात्रियों के लिए वैध रहने की अवधि और पंजीकरण प्रक्रिया में बड़े बदलाव आए हैं। इस नियम के तहत अब सभी विज़िटर वीज़ा धारकों को अपने आगमन के 180 दिनों के भीतर ही विदेशियों के कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यह बदलाव पहले के 14‑दिन के ग्रेस पीरियड को समाप्त कर देता है, जिससे विदेशियों को पंजीकरण में देरी करने का कोई अवसर नहीं बचता। नई व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी प्रवासियों की निगरानी को सुदृढ़ बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये बेहतर डेटा संकलन सुनिश्चित करना है। नियमों के विस्तृत बिंदु यह हैं: प्रथम, सभी टूरिस्ट, व्यापारिक और चिकित्सा वीज़ा वाले विदेशी नागरिकों को आगमन के 180 दिनों के भीतर अपने पासपोर्ट, वीज़ा विवरण, भारतीय पता और संपर्क नंबर के साथ विदेशी मामलों के विभाग में पंजीकरण करना होगा। द्वितीय, इस पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन दोनो उपलब्ध हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और सहज हो गई है। तृतीय, यदि पंजीकरण समय सीमा से अधिक हो जाता है तो विदेशियों को जुर्माना संलग्न किया जाएगा और अगले वीज़ा आवेदन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। चतुर्थ, 180‑दिन के बाद भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों को एक बार फिर विस्तारित रहने की अनुमति लेने हेतु पुन: आवेदन करना अनिवार्य होगा, जो पहले के 14‑दिन ग्रेस पीरियड के बाद लक्ज़री नहीं माना जाता। इन बदलावों से प्रवासियों के अधिकारों में भी कुछ संशोधन हुए हैं। अब विदेशी नागरिकों को अपने पते का प्रमाण, जैसे कि किराये का अनुबंध या होटल बुकिंग, पेश करना आवश्यक है, जिससे उनकी फिटनेस और रहने की स्थिति की जांच आसान हो सके। साथ ही, विदेशियों के लिये अब सिंगल एंट्री वीज़ा पर भी अतिरिक्त दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता होगी, जबकि मल्टीपल एंट्री वीज़ा धारकों को कुछ ही दस्तावेज़ों में छूट मिल सकती है। यह उपाय विदेशियों को अपने प्रवास को नियोजित करने और अनावश्यक बाधाओं से बचने के लिये प्रेरित करता है। कुल मिलाकर, भारत की नई इमिग्रेशन नीति प्रवासियों की संख्या में पारदर्शिता लाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आर्थिक पहलुओं में सुधार लाने का प्रयास है। हालांकि इस नीति के प्रारंभिक चरण में कुछ विदेशी यात्रियों को प्रक्रिया की जटिलता और समय सीमा को लेकर चिंताएं जताई गई हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल पंजीकरण प्रणाली की मदद से यह सब आसान हो जाएगा। इस नई व्यवस्था का प्रभाव देखते हुए, भविष्य में अन्य देशों की इमिग्रेशन नीतियों के साथ तुलना और संगति भी संभव हो सकती है।