📰 Kotputli News
Breaking News: राहुल गांधी ने आरोप लगाया: CBSE की कक्षा 12 की उत्तर पत्रिकाएँ मोबाइल से स्कैन कर धोखा
🕒 1 day ago

देश के शिक्षा विभाग पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई बोर्ड के कक्षा 12 के उत्तर पत्रिकाओं को मोबाइल फ़ोन से स्कैन करके बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे "धोखाधड़ी" कहा और कहा कि इस तरह की प्रक्रिया न केवल छात्रों के भविष्य को खतरे में डालती है, बल्कि पूरे शैक्षिक तंत्र की विश्वसनीयता को भी कमजोर करती है। इस बयान के बाद शिक्षा मंत्री और बोर्ड की प्रतिक्रिया में कहा गया कि ऐसी किसी भी अनियमितता की पूरी जाँच की जाएगी और जिम्मेदारों को कड़ी सजा दी जाएगी। राहुल गांधी ने कहा कि मोबाइल से उत्तर पत्रिकाएँ स्कैन करना तकनीकी रूप से संभव है और इससे परीक्षा के परिणामों में हेरफेर करना आसान हो जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह केवल एक ही बार नहीं हुआ है, बल्कि इससे पहले भी कई बार ऐसी शिकायतें आई हैं, लेकिन उनके समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। इस संदर्भ में उन्होंने शिक्षा मंत्रालय को ‘ऑफ़लाइन सेंसिटिव मैटेरियल’ (OSM) के टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और सरकारी रिव्यूज को स्वतंत्र बनाकर उत्तर पत्रिकाओं की पुनः मूल्यांकन प्रक्रिया को सच्चा तथा निष्पक्ष बनाने की मांग की। शिक्षा मंत्री ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि बोर्ड ने पूरी तरह से डिजिटल सुरक्षा उपाय अपनाए हैं और उत्तर पत्रिकाओं को स्कैन करने की कोई वैध प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के डेटा लीकेज या दुरुपयोग का पता चलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सबसे पहले छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा की अखंडता प्राथमिकता है, और इस दिशा में बोर्ड ने कड़े नियम और निगरानी प्रणाली लागू कर रखी है। इन घटनाओं के बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्रालय पर सरकार की लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि विपक्षी दलों ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि शिक्षा के मूलभूत सिद्धांतों को बचाने का संघर्ष है। समाचार पत्रों और टेलीविज़न चैनलों ने इस मुद्दे को लेकर विस्तृत चर्चाएँ कीं, जिसमें कई विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल शिक्षा में सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। अंत में यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के आरोपों का समाधान तभी संभव होगा जब सभी संबंधित पक्ष मिलकर पारदर्शिता और निरीक्षण को बढ़ावा दें। यदि सही कदम नहीं उठाए गये तो छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी रहेगी और सार्वजनिक भरोसा भी टूट सकता है। इस कारण से यह जरूरी है कि सरकार, शिक्षा बोर्ड और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर उत्तर पत्रिकाओं की सुरक्षा और पुनः मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार लाएँ, ताकि प्रामाणिक और विश्वसनीय शिक्षा प्रणाली को बनाए रखा जा सके.

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 02 Jun 2026