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Breaking News: सुप्रीम कोर्ट ने NEET‑UG री‑टेस्ट के लिए कंप्यूटर‑आधारित मोड को ठुकराया, ऑफ़लाइन परीक्षा तय
🕒 2 days ago

राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल प्रवेश के सबसे बड़े परीक्षा NEET‑UG की पुनः परीक्षा के प्रस्ताव पर आज न्यायालय ने स्पष्ट राय दी। कई चिकित्सा aspirants ने कॉम्प्यूटर‑आधारित परीक्षण (CBT) की मांग कर याचिका दायर की थी, क्योंकि पिछले वर्ष में प्रश्नपत्र लीक और पेपर चोरी के मामलों ने इस प्रणाली की अखंडता पर सवाल उठाए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को मान्यता नहीं दी, और मौजूदा ऑफ़लाइन मोड में ही परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया। यह निर्णय विभिन्न प्रमुख समाचार स्रोतों में विस्तृत रूप से बताया गया है, जहाँ कोर्ट ने याचिका को अस्वीकार करने के कई कारणों को स्पष्ट किया। कोर्ट ने प्रमुख रूप से यह कहा कि परीक्षा का मौजूदा ढांचा, जिसमें कागजी प्रश्नपत्र और व्यक्तिगत उत्तर पुस्तिका शामिल हैं, अब तक विश्वसनीय सिद्ध हुआ है। इस प्रणाली को लागू करने में प्रयुक्त मानक प्रक्रियाओं को हटाकर नया डिजिटल मोड अपनाने से अधिक जटिल तकनीकी समस्याएँ और सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया था कि डिजिटल मोड में पेपर लीक की संभावना घटेगी, परन्तु न्यायालय ने इस बात को उलटते हुए कहा कि तकनीकी त्रुटियों, सर्वर क्रैश और डेटा उल्लंघन जैसी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिससे परीक्षार्थियों के अवैध लाभ का अवसर बढ़ सकता है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पुनः परीक्षा का समय सीमा बहुत संकीर्ण है, और इस कारण से सभी परीक्षा केंद्रों को आवश्यक डिजिटल उपकरणों से सुसज्जित करना व्यावहारिक नहीं है। संस्थागत संसाधनों की कमी, नेटवर्क कनेक्टिविटी की विविधता और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधाओं की अपर्याप्तता को देखते हुए, कागजी मोड अधिक सुलभ और निष्पक्ष माना गया। इसलिए, न्यायालय ने मौजूदा ऑफ़लाइन परीक्षा का पालन करने का आदेश दिया और पुनः परीक्षा को जून महीने में निर्धारित किया, ताकि छात्रों को पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके। इस फैसले का व्यापक प्रभाव है। मेडिकल aspirants को अब अपने अध्ययन पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा, बिना डिजिटल प्रणाली की अनिश्चितताओं के डर के। शिक्षा विभाग को भी इस दिशा में स्पष्ट संकेत मिला है कि भविष्य में बड़े पैमाने पर कंप्यूटर‑आधारित परीक्षा लागू करने से पहले पर्याप्त बुनियादी ढाँचा तैयार करना आवश्यक होगा। अंत में, यह न्यायिक निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि NEET‑UG की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे, जिससे देश भर के छात्र एक समान माहौल में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 Jun 2026