कर्नाटक के प्रकट में दिल्ली दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री के.सी. वेणुगोपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने केवल राजसभा चुनाव पर ही चर्चा की, बाकी सभी बातें केवल अटकलें हैं। यह बयान वेणुगोपाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया, जहाँ उन्होंने बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ वर्ग ने कर्नाटक में आगे की किसी भी राजनीतिक योजना पर कोई निर्णय नहीं लिया है। वेणुगोपाल ने यह भी उजागर किया कि कर्नाटक में सिद्दारामैया या डीके शिवाकुमार के इस्तीफे की बात सिर्फ मीडिया में चल रही अटकलों के आधार पर ही उभरी है, परन्तु पार्टी के अंदर ऐसी कोई रणनीति नहीं बनी है। राजसभा के चुनाव की तैयारी के तहत कांग्रेस ने दिल्ली में कई बैठकों का आयोजन किया, परन्तु इन बैठकों में कर्नाटक के भविष्य को लेकर कोई ठोस विचार नहीं बनाया गया। वेणुगोपाल ने कहा, "हमारी पार्टी में एकजुटता बनी हुई है और हम किसी भी तरह की अटकलों पर प्रतिक्रिया नहीं देते।" इस बीच, कई अनुभवी नेता और पार्टी के प्रबंधक कथित रूप से कर्नाटक की राजनीति में हो रहे बदलावों को लेकर चिंतित हैं, किन्तु वे भी इस बात को दोहराते हैं कि अब तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। कर्नाटक के भीतर कई व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा चल रही है, जैसे औद्योगिक विकास, जलसंसाधन की सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के कार्यक्रम। परन्तु इन मुद्दों पर कांग्रेस का फोकस अभी तक राष्ट्रीय स्तर के चुनावी रणनीति पर ही रहता हुआ है। इस कारण से कई कर्नाटक के कार्यकर्ता और प्रत्याशी यह समझते हैं कि यदि राजसभा चुनाव में अच्छे परिणाम नहीं मिलने पर पार्टी को राज्य में अपना ठोस दिशा निर्धारण करना पड़ेगा। यह आशंका परन्तु अभी तक पार्टी के आधिकारिक बयानों में नहीं आई है। वर्तमान में कर्नाटक की राजनीति में एक सूक्ष्म संतुलन बना हुआ है। कांग्रेस ने राज्य में दृढ़ता से अपना समर्थन दिखाने के लिए कई मुलाकातें की हैं, परन्तु उनके कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वह अब तक केवल राजसभा चुनावों के मंच पर ही ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। वेणुगोपाल ने इस बात का भी उल्लेख किया कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की बात केवल अटकलें ही हैं और कोई वास्तविकता नहीं है। अंततः, उन्होंने सभी को यह आश्वस्त किया कि कांग्रेस अपने मूल सिद्धांतों पर कायम रहेगी और किसी भी अटकल-परिकल्पना के आधार पर निर्णय नहीं लेगी।