डॉडरशन के मुख्य एंकर ने हाल ही में एक दिल्ली स्कूल के छात्र को 'पाकिस्तानी' कहकर नाराज़गी जताते हुए सोशल मीडिया में शोर मचा दिया। यह टिप्पणी तब आई जब वह छात्र सीबीएसई की मार्किंग सम्बंधी समस्या को उठाकर आरोप लगा रहा था कि बोर्ड ने उसके अंक में गलती की है। एंकर ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए छात्र के बयान को निंद्य किया और उसे 'देशद्रोह' का लाबा दिया, जिससे दर्शकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में भारी विरोध की लहर उठी। कई लोग इस बयान को समाचार प्रसारण की नीति के विरुद्ध मानते हुए, एंकर के पक्ष में लिखे गए अनुचित शब्दों को लेकर न्याय संगत कदमों की मांग कर रहे हैं। विरोध के बीच, सीबीएसई ने बाद में यह स्वीकार किया कि मार्किंग प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि हुई थी और प्रभावित विद्यार्थियों को पुनः जांच के बाद सही अंक प्रदान करने का वादा किया। बोर्ड ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराने से बचने के लिये भुगतान गेटवे और ग्रेडिंग सिस्टम में सुधार किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्रिणी धर्मेंद्र प्रधान ने चार प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ मिलकर सीबीएसई के भुगतान प्रणाली को अपडेट करने की योजना को पेश किया, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क और परिणाम संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता आयेगी। डॉडरशन के इस बयान के बाद छात्र के भाई ने भी सोशल मीडिया पर अपना तेज़ जवाब दिया। उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तानी नहीं हैं, हम भारतीय हैं और केवल शिक्षा के अधिकार की मांग कर रहे हैं।" इस प्रतिक्रिया ने कई नेटिज़नों का समर्थन अर्जित किया और एंकर के व्यवहार पर कड़ी निंदा की। कई समाचार पोर्टल और राष्ट्रीय दैनिक ने इस मुद्दे को राष्ट्रीयता के मुद्दे के बजाय शैक्षिक प्रणाली की पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के रूप में प्रस्तुत किया। इस विवाद ने एक बार फिर मीडिया की जिम्मेदारी और पत्रकारिता के नैतिक मानकों पर सवाल खड़े कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं को व्यक्तिगत या समूह के प्रति अपमानजनक भाषा से बचते हुए तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करनी चाहिए। साथ ही, छात्रों को अपने शैक्षणिक अधिकारों के लिये आवाज़ उठाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए, परंतु उन्हें भी पेशेवर भाषा का प्रयोग करना चाहिए ताकि संवाद का स्वर सम्मानजनक बना रहे। निष्कर्षतः, डॉडरशन के एंकर के बयान ने शिक्षा प्रणाली में मौजूदा त्रुटियों को उजागर किया है जबकि साथ ही मीडिया के आचार संहिता पर भी चर्चा को प्रज्वलित किया है। सीबीएसई द्वारा की गई त्रुटि सुधार और भुगतान प्रणाली के आधुनिकीकरण के कदम सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं, परंतु सार्वजनिक प्रसारण में उपयोग की जाने वाली भाषा और टोन को भी उचित रूप से सुधारने की आवश्यकता है। इस तरह की घटनाएँ समाज में संवाद के स्वस्थ माहौल को बनाये रखने के लिये सभी पक्षों को अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील बनाने के संकेत देती हैं।