कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद पर किसी भी बदलाव की संभावना को लेकर चल रहे अटकलों के बीच कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में कोई भी परिवर्तन नहीं होगा। दिल्ली में आयोजित दल की राजनैतिक बैठक में इस विषय पर चर्चा के दौरान पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर धारा 165(3) के तहत कोई भी अटकलें मात्र समाचार रूम की कल्पना हैं, और इस पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। इस वजह से राज्य में राजनीतिक माहौल स्थिर बना हुआ है और जनता को किसी भी प्रकार की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने बताया कि बैठक में कर्नाटक में विकास कार्य, पंचायत सुधार और किसानों की स्थिति को मुख्य एजेंडे माना गया था। उन्होंने कहा कि पार्टी का फोकस अभी राज्य की आवश्यकता अनुसार कार्यों को आगे बढ़ाने पर है, न कि मुख्यमंत्री के बदलने पर। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि सिद्दारामैया, डी.के.एस. या किसी अन्य पार्टी नेता के बीच कोई भी संघर्ष नहीं है, और वरिष्ठ नेताओं के बीच एकजुटता बनी हुई है। इस एकजुटता के कारण कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार को बंधुता का माहौल प्राप्त हो रहा है, जिससे विकास कार्यों में गति आती है। राज्य में विपक्षी नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार की नीति को आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद पर कोई स्थिरता नहीं है और इस कारण शासन में अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है। परंतु कांग्रेस के वार्ताकारों ने इस बात को निरस्त किया और कहा कि विपक्ष के इस आरोप का कोई आधार नहीं है, तथा सरकार अपने कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में हुई बैठक में कर्नाटक के विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी गई थी, जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार शामिल है। इस बीच, के.सी. वेनुगोपाल, जो कांग्रेस के राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष हैं, ने मीडिया को बताया कि उन्होंने दिल्ली में इस बैठक के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री परिवर्तन के बारे में कोई चर्चा नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की उच्च कमान ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में सीएम पद पर बदलाव की कोई संभावना नहीं है और यह केवल अटकलों की प्रक्रिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर एकमत होकर कहा है कि वर्तमान मुख्यमंत्री को समर्थन जारी रहेगा और वह अपने कार्यकाल को पूरी लगन से निभाएंगे। अंत में, यह कहा जा सकता है कि कर्नाटक में राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से अपने इरादे का इशारा किया है। दिल्ली में हुई बैठक के एजेंडा से यह स्पष्ट हुआ कि पार्टी का ध्यान विकास कार्यों पर है और मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बदलाव नहीं होगा। इस स्थिति में राज्य के जनता को आशा है कि प्रशासन स्थिर रहकर विकास को बढ़ावा देगा और कर्नाटक को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।