अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत, संयुक्त राज्य, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने 26 मई को न्यूयॉर्क में एक प्रखर बैठक की, जहाँ भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इंडो‑पैसिफिक को विश्व आर्थिक विकास का प्रमुख चालक माना। यह मिलन क्वाड (Quadrilateral Security Dialogue) के तहत हुआ, जिसमें क्षेत्रों की बढ़ती आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों को मिलकर संबोधित करने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। जयशंकर ने कहा कि इस समुद्री क्षेत्र की आर्थिक महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यहाँ विश्व का लगभग 60 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार और 30 प्रतिशत ऊर्जा संसाधन प्रवाहित होते हैं। इसीलिए, इस क्षेत्र को स्थिर, मुक्त और खुला रखने के लिए चार प्रमुख लोकतांत्रिक देशों को सामूहिक रूप से कदम उठाने होंगे। बैठक में क्वाड का नया ऊर्जा सुरक्षा ढाँचा प्रस्तुत किया गया, जो इंधन, खनिज और प्रौद्योगिकी आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए शिपिंग मार्गों की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण और चीन के निर्यात नियंत्रणों से बचाव पर केंद्रित है। इस संदर्भ में, भारत और संयुक्त राज्य ने रणनीतिक खनिजों पर एक समझौता किया, जिससे दोनों देशों को इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और सैफ़्टवेयर उद्योग में आवश्यक दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की पहुँच सुनिश्चित हो सके। यह कदम चीन के कठोर निर्यात नियंत्रणों के जवाब में उठाया गया, जिससे क्वाड के सदस्य अपने स्वयं के औद्योगिक बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ कर सकें। इंडो‑पैसिफिक में अस्थिरता के प्रमुख कारणों में से एक खाड़ी जल में हो रहे तनाव को भी माना गया, विशेषकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया संघर्ष को देखते हुए। इस संकट के बीच क्वाड ने एक सामूहिक ऊर्जा सुरक्षा पहल का एलान किया, जिसमें समुद्री मार्गों की सुरक्षा, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विकास और आपूर्ति बाधाओं को रोकने के लिए आपसी सूचना साझाकरण शामिल है। इस पहल के तहत, सदस्य राष्ट्र एक साथ मिलकर समुद्री पटरियों की निगरानी करेंगे और आपातकालीन स्थिति में तत्काल सहायता प्रदान करेंगे, जिससे विश्वव्यापी वाणिज्य में किसी भी बाधा को टाला जा सके। समापन में, जयशंकर ने इस बात पर बल दिया कि इंडो‑पैसिफिक का सशक्त और समावेशी विकास केवल चार देशों की बात नहीं, बल्कि पूरे विश्व को लाभान्वित करेगा। उन्होंने कहा, "यदि हम इस क्षेत्र को खुला, पारदर्शी और नियामक-रहित बनाए रखेंगे, तो यह न केवल आर्थिक उन्नति का स्रोत बनेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला जोखिमों के लिये भी एक स्थिर मंच प्रदान करेगा।" इस प्रकार क्वाड ने न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक सहयोग को भी एक नई दिशा दी, जो भविष्य में वैश्विक विकास को गति देने के लिए आधारशिला बन जाएगी।