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Breaking News: भारी ताप में गिग कामगारों की थकान: भारत में बढ़ती गर्मी ने थका दिया कामजगत
🕒 1 week ago

भारत में इस गर्मी की लहर ने न केवल सामान्य जनता को, बल्कि गिग कामगारों को भी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करवा दिया है। फूड डिलीवरी, राइड शेयरिंग, छोटे-मोटे काम करने वाले हजारों करोड़पति रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सड़कों पर निकलते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती तापमान के कारण उनका शरीर कमजोर हो रहा है। कई श्रमिकों ने बताया कि दिन में काम करते समय सिर घूमने लगता है, साँसें फूल जाती हैं और थकान से उनका काम धीमा पड़ जाता है। रात की गर्मी में बिजली की कमी, आउटेज और एसी के चलाने की जटिलता ने उनके जीवन स्तर को और अधिक कठिन बना दिया है। गर्मियों की इस बेतहाशा लहर ने ऊर्जा ग्रिड पर भी बड़ा बोझ डाला है। रात में ठंडक बनाए रखने के लिए बिजली की मांग में अचानक तेज़ी आई है, जिससे कई क्षेत्रों में आवर्ती बिजली कटौती हो रही है। इससे डिलीवरी वाले, राइड शेयर ड्राइवर और छोटे व्यवसायी अपने काम को सुचारू रूप से नहीं चला पा रहे हैं। इसके साथ ही, गर्मी के कारण बढ़ती एसी की जरूरत ने पर्यावरणीय प्रभाव को भी बढ़ा दिया है, जिससे वायुमंडलीय प्रदूषण की समस्या और अधिक गंभीर हो गई है। वायुमंडलीय मौसम विभाग ने बताया कि इस गर्मी की लहर में आगामी दिनों में तापमान और भी बढ़ेगा, और रात में भी ठंडक नहीं होगी। दिल्ली ने 14 साल में सबसे गर्म रात का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, और कई शहरों में लगातार गरम रातों का खतरा बना रहता है। इस स्थिति में गिग कामगारों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें देर रात तक काम करना पड़ता है और उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। कई शारीरिक रोग जैसे हृदय रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं और डिहाइड्रेशन की स्थिति अधिक आम हो गई है। इन सभी कठिनाइयों के बीच, सरकार और विभिन्न संगठनों ने राहत के उपाय प्रस्तुत करने शुरू किए हैं। मौसम विभाग ने 29 मई से शुरू होने वाले ठंडे मौसम की आशा जताई है, जिससे कामगारों को कुछ राहत मिल सकती है। साथ ही, कई प्लेटफ़ॉर्म ने श्रमिकों को अतिरिक्त भत्ते देने, हाइड्रेशन पैकेज उपलब्ध कराने और कार्य समय में लचीलापन देने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन इन उपायों को प्रभावी बनाने के लिये ठोस नीति और नियामक कार्रवाई की आवश्यकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 26 May 2026